आम के पेड़ों पर चला आरा, ऊपर से फर्जी सरकारी ठप्पा! इंदौर भेजने की थी तैयारी

कवर्धा। आम के पेड़ काटे गए, उन पर वन विभाग की नकली मुहर लगा दी गई और फिर उन्हें सैकड़ों किलोमीटर दूर इंदौर भेजने की तैयारी थी। लेकिन लकड़ी तस्करों का यह पूरा खेल प्रशासन की समय पर हुई कार्रवाई के चलते बीच रास्ते ही धराशायी हो गया।
मामला कबीरधाम जिले के रेंगाखार तहसील के ग्राम भीमभौरी का है, जहां अवैध वृक्ष कटाई की सूचना मिलते ही राजस्व, वन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। जांच में खसरा क्रमांक 108 पर 12 आम के पेड़ कटे मिले। लकड़ियों को ट्रक में लोड करने की तैयारी चल रही थी और मौके पर एक क्रेन भी मौजूद थी।
पहली नजर में ऐसा लगा कि लकड़ी पूरी तरह वैध है, क्योंकि हर लट्ठे पर वन विभाग की मुहर लगी हुई थी। लेकिन जब वन विभाग ने अपनी ही मुहर की जांच की तो कहानी पलट गई। डिप्टी रेंजर के सत्यापन में सामने आया कि लट्ठों पर लगी सील फर्जी थी। यानी अवैध लकड़ी को सरकारी अनुमति का “चोला” पहनाकर बाहर भेजने की तैयारी की जा रही थी।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि लकड़ी की खेप मध्य प्रदेश के इंदौर भेजी जानी थी। इससे पहले ही प्रशासन ने ट्रक और क्रेन को जब्त कर पूरा खेल रोक दिया। मौके पर पंचनामा तैयार कर लकड़ी को कब्जे में लिया गया।
अब जांच केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है। फर्जी सरकारी सील किसने बनाई, किसने लगाई, लकड़ी किसके कहने पर काटी गई और इसके पीछे पूरा नेटवर्क कौन चला रहा था—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि जंगल से लेकर बाजार तक फैले लकड़ी तस्करी के नेटवर्क पर प्रशासन की नजर है। यदि जांच की कड़ियां जुड़ती गईं तो इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।



