17 लाख का ‘चेक डैम’ या ‘चेकमेट’? पहली बारिश में खुल गई पोल, निजी जमीन पर सरकारी खर्च का आरोप

कवर्धा। मनरेगा के तहत बना 17 लाख रुपये का चेक डैम पहली ही बारिश में सवालों के बहाव में बहता नजर आ रहा है। कहीं दरारें, कहीं धंसाव और ऊपर से निजी जमीन पर निर्माण का आरोप… ऐसे में ग्राम पंचायत कोयलारीकला का यह चेक डैम अब पानी रोकने से ज्यादा विवादों को समेटता दिखाई दे रहा है।
गांव के निवासी येकल सिंह ने जनपद पंचायत पंडरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शिकायत देकर दावा किया है कि चेक डैम उनकी निजी भूमि खसरा नंबर 902/1 (904, 905) पर बनाया गया है। शिकायत में निर्माण को निरस्त करने, राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
मामला यहीं नहीं थमता। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 17 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद चेक डैम पहली ही बारिश में जवाब देने लगा। कई जगहों पर दरारें पड़ गईं और निर्माण का हिस्सा धंसने लगा। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जमीन निजी थी तो सरकारी पैसा आखिर किसके भरोसे बहा दिया गया? क्या निर्माण से पहले इंजीनियर ने मौके का निरीक्षण किया था? क्या राजस्व रिकॉर्ड देखा गया था? या फिर कागजों में सब कुछ ठीक दिखाकर निर्माण की हरी झंडी दे दी गई?
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि निर्माण स्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए, गुणवत्ता की तकनीकी जांच हो और शिकायत सही मिलने पर सरपंच, उपयंत्री और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं। सवाल सिर्फ एक चेक डैम का नहीं, बल्कि उन व्यवस्थाओं का भी है जिनके भरोसे लाखों रुपये की योजनाएं जमीन पर उतरती हैं। अगर आरोप सही निकले, तो यह मामला मनरेगा कार्यों में जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बन सकता है।



