77 लाख की धान गड़बड़ी में तीन पर एफआईआर, बम्हनी केंद्र में 2386 क्विंटल धान गायब

कवर्धा। कबीरधाम जिले के बम्हनी (समनापुर) धान खरीदी केंद्र में करीब 77 लाख रुपए की आर्थिक अनियमितता का मामला सामने आया है। संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर खरीदी प्रभारी, समिति प्रबंधक और तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में धान की कमी, बारदानों का हिसाब नहीं मिलने और रिकॉर्ड में अनियमितताओं की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव की रेंगाखार शाखा के प्रबंधक अमित चंदेल की शिकायत पर दर्ज मामले के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में बम्हनी उपार्जन केंद्र में 55,220.40 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी बैंक के संयुक्त दल ने 12 जून 2026 को केंद्र का निरीक्षण किया।
जांच में पाया गया कि खरीदी पंजी की क्लोजिंग रिपोर्ट पर समिति प्रबंधक और संबंधित नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे। ऑनलाइन रिपोर्ट और भौतिक सत्यापन के दौरान 2,386.52 क्विंटल धान कम मिला। इसकी अनुमानित कीमत 73.98 लाख रुपए आंकी गई। वहीं 8,554 उपयोग-विहीन बारदाने भी रिकॉर्ड के मुकाबले कम पाए गए, जिनकी कीमत 3.27 लाख रुपए बताई गई है।
इस प्रकार धान और बारदानों की कुल कमी 77.26 लाख रुपए की आर्थिक क्षति के रूप में दर्ज की गई। मामले में खरीदी प्रभारी मत्तूलाल झारिया, समिति प्रबंधक अनिल कुमार चंद्राकर और तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर छन्नूराम साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
सचिव के निर्देशों के बाद भी उठ रहे सवाल
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से पूर्व में जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया था कि धान भंडारण में 2 प्रतिशत से अधिक कमी पाए जाने पर तत्काल निलंबन, विभागीय जांच और एफआईआर की कार्रवाई की जाए। ऐसे में जिले के कई केंद्रों में बड़ी मात्रा में धान की कमी सामने आने के बावजूद व्यापक कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
58 हजार क्विंटल से अधिक धान गायब होने का दावा
युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया है कि मार्कफेड की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 20 जून तक 58,443 क्विंटल धान की कमी दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि सूरजपुरा, कामठी, उसरवाही, समनापुर, बोदा, रक्से और जुनवानी समेत कई उपार्जन केंद्रों में हजारों क्विंटल धान का अंतर सामने आया है।
केशरवानी ने आरोप लगाया कि संबंधित विभागों और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण पूरे मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इंसेंटिव पर भी पड़ सकता है असर
धान उपार्जन नीति 2025-26 के अनुसार केवल उन्हीं समितियों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जिनमें धान की कमी शून्य हो और किसी प्रकार की अनियमितता न पाई गई हो। ऐसे में जिन समितियों में शार्टेज या गड़बड़ी सामने आई है, उनकी इंसेंटिव राशि प्रभावित हो सकती है।



