हाईलाइट्स

18वें दिन भी जारी सोनम वांगचुक का अनशन: बिगड़ी तबीयत, हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर चल रहा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल बुधवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है कि अब तक उनकी सुरक्षा और उपचार के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

28 जून से शुरू हुआ आंदोलन

सोनम वांगचुक ने 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। यह आंदोलन NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग के समर्थन में चल रहे अभियान से जुड़ा है। आंदोलनकारी परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित कई मांगें उठा रहे हैं।

स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

लगातार 18 दिनों के उपवास के कारण वांगचुक का स्वास्थ्य कमजोर हुआ है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है और रक्तचाप भी सामान्य से नीचे पहुंचने की बात सामने आई है। चिकित्सकीय हस्तक्षेप की मांग को लेकर अदालत में जनहित याचिका भी दायर की गई है।

1800 से अधिक हस्तियों की अपील

देशभर के शिक्षाविदों, कलाकारों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित 1800 से अधिक प्रमुख हस्तियों ने संयुक्त अपील जारी कर सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि वांगचुक देश की महत्वपूर्ण आवाज़ हैं और उनका स्वस्थ रहना आंदोलन से भी अधिक जरूरी है। कई फिल्मी हस्तियों ने भी सार्वजनिक रूप से समर्थन व्यक्त किया है।

राजनीतिक माहौल भी गरमाया

इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर संवाद से बचने का आरोप लगा रहा है, जबकि आंदोलन से जुड़े संगठन केंद्र पर चुप्पी साधने का आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर सरकार की ओर से अब तक आंदोलन की मुख्य मांगों पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

आगे क्या?

दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद केंद्र और दिल्ली सरकार को अपना पक्ष रखना होगा। वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और समर्थकों ने आंदोलन को और व्यापक बनाने की बात कही है। वांगचुक की सेहत पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि लंबे अनशन के चलते चिकित्सकों ने स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ने की आशंका जताई है।

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