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TET के खिलाफ देशव्यापी हुंकार, दिल्ली में जुटे लाखों शिक्षक, कबीरधाम से बड़ी संख्या में हुए शामिल

नई दिल्ली/कवर्धा। टीईटी (TET) की अनिवार्यता के विरोध में शनिवार को देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित देशव्यापी धरना-प्रदर्शन में कबीरधाम जिले से भी बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। अपनी सेवा शर्तों और अधिकारों की रक्षा को लेकर शिक्षकों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

यह आंदोलन टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। आयोजन को लेकर कबीरधाम जिले में भी पूर्व से तैयारी की गई थी। केंद्रीय स्तर पर संगठन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा के मार्गदर्शन में तथा छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर के नेतृत्व में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही। जिला स्तर पर अध्यक्ष प्रेम नारायण शर्मा के मार्गदर्शन तथा कार्यकारी अध्यक्ष केशलाल साहू के नेतृत्व में जिले के चारों ब्लॉकों से शिक्षक प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचे। इनमें लोकेंद्र चंद्रवंशी, राजेश प्रसाद मिश्रा, सुरेश सिंह ठाकुर, धर्मू दास कुर्रे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक साथी शामिल रहे। जिला पदाधिकारी संजय साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी आंदोलन में सहभागिता निभाई।

रामलीला मैदान में आयोजित इस प्रदर्शन में शिक्षकों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर “No TET Before RTE Act” जैसे नारे लगाए और अपनी मांगों को मुखरता से रखा। आंदोलन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता परीक्षा थोपना अन्यायपूर्ण है और इससे उनके भविष्य पर अनावश्यक संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय निर्धारित मूल सेवा शर्तों का सम्मान किया जाना चाहिए और लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को नई परीक्षा के नाम पर प्रताड़ित करना उचित नहीं है।

शिक्षकों ने अपनी प्रमुख मांगों में संसद में विधेयक लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने, पूर्व निर्धारित सेवा शर्तों को यथावत रखने तथा 20-25 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को नई पात्रता परीक्षा से मुक्त रखने की मांग प्रमुखता से उठाई। वक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि समय रहते सरकार ने इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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आंदोलन में शामिल शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि सरकार को उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और किसी भी शिक्षक को जबरन नई पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे अपने अधिकारों की लड़ाई बताते हुए कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

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रुपेश चन्द्रवंशी

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लेखक/संपादक BJMC (Bachelor of Journalism & Mass Communication) डिग्रीधारी एवं 12 वर्षों से अधिक के मीडिया अनुभव के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेब मीडिया में पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है।

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