‘वोट चोरी’ के आरोपों पर दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, राहुल बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त को जाना होगा

रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली; 21 दलों के नेताओं ने लिया हिस्सा, SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल, चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज किया
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच जारी टकराव रविवार को दिल्ली की सड़कों पर दिखाई दिया। INDIA गठबंधन ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली आयोजित कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत गठबंधन के 21 दलों के प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से नेता खुले वाहन में मिंटो रोड पहुंचे। वहां से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, फारूक अब्दुल्ला और अन्य नेता समर्थकों के साथ रामलीला मैदान की ओर मार्च करते हुए पहुंचे। रास्ते में कार्यकर्ता झंडे और पोस्टर लेकर नारेबाजी करते रहे।
राहुल ने कहा- वोट का अधिकार छीनने की कोशिश, खड़गे बोले- मांग पूरी होने तक आंदोलन
रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ने की मांग दोहराई। राहुल ने कहा कि देश के हर नागरिक की आवाज और वोट का अधिकार महत्वपूर्ण है।


कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद से नहीं हटते, विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर महिलाओं, युवाओं और दलितों के वोट प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने अयोध्या में राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे से जुड़े आरोपों का जिक्र करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भी मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को लेकर अपनी आपत्ति जताई और कहा कि उनकी पार्टी इसका विरोध जारी रखेगी।
भाजपा और चुनाव आयोग का जवाब: सूची सुधारने की प्रक्रिया बताया

विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना, दोहरे और अपात्र नाम हटाना है। आयोग ने किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के मुताबिक, जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटे हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने रैली को लोकतंत्र के सम्मान के बजाय देश में अव्यवस्था पैदा करने की सुनियोजित कोशिश करार दिया।
SIR पर टकराव अब राजनीतिक से कानूनी लड़ाई की ओर

मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष पहले भी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर चुका है। इस बार 21 दलों के नेताओं का एक मंच पर आना विपक्षी एकजुटता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपने फैसले को मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़ी नियमित प्रक्रिया बता रहा है।
अब इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि SIR के दौरान हटाए गए नामों में कितने नाम वास्तव में अपात्र मतदाताओं के थे और कितने पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटे। इसका जवाब मतदाता सूची के आंकड़ों, शिकायतों और उनके निस्तारण की पारदर्शी जानकारी से ही सामने आएगा।




