अरुणाचल में कई जगह भारतीय-चीनी सैनिक आमने-सामने, सीमा पर तनाव बरकरार

ITBP प्रमुख के बयान के बाद सियासत तेज; कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब, विदेश मंत्रालय बोला- चीनी सैनिकों के गश्त के तौर-तरीके बदलने से बिगड़ते हैं हालात
नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने होने की बात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कही है। 23 अक्टूबर को दिए गए उनके बयान के बाद सीमा की मौजूदा स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरे मामले पर स्पष्ट बयान देने की मांग की है।
ITBP प्रमुख के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों के दौरान कई स्थानों पर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आए और ऐसी स्थिति अभी भी बनी हुई है। हालांकि, उनके बयान में किसी क्षेत्र पर चीनी कब्जे की पुष्टि नहीं की गई है।
तक्षिंग क्षेत्र में गश्त को लेकर विवाद
अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले का तक्षिंग क्षेत्र भारत-चीन सीमा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इस क्षेत्र में भारतीय सैनिकों की पारंपरिक गश्त और चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं।

जुलाई और अगस्त में इस इलाके में भारतीय सैनिकों की गश्त प्रभावित होने और चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर खबरें आई थीं। हालांकि, भारतीय सेना ने तक्षिंग क्षेत्र में चीनी अतिक्रमण और नए शिविर बनाए जाने संबंधी कुछ खबरों को गलत और निराधार बताया था। ऐसे में सैनिकों के आमने-सामने आने और भारतीय क्षेत्र पर कब्जे के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
विदेश मंत्रालय ने भी माना, गश्त के दौरान बिगड़ते हैं हालात
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर को कहा कि जब चीनी सैनिक निर्धारित गश्त के तौर-तरीकों से अलग व्यवहार करते हैं, तब सीमा पर स्थिति समय-समय पर बिगड़ती है। उन्होंने कहा कि दोनों देश मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक व्यवस्थाओं के माध्यम से लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
सितंबर में भी भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच कमांडर स्तर की बैठकें हुई थीं। इन बैठकों का उद्देश्य सीमा पर तनाव कम करना और शांति बनाए रखना था। इसके बावजूद अक्टूबर में सैनिकों के आमने-सामने होने की स्थिति बने रहने की बात सामने आई है।
कांग्रेस ने पूछा- सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है?
ITBP प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री से सीमा की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या भारतीय सैनिकों की पारंपरिक गश्त प्रभावित हुई है और क्या मई 2020 से पहले की स्थिति पूरी तरह बहाल हो चुकी है।
पार्टी ने सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर संसद और देश के सामने विस्तृत जानकारी रखने की मांग की है। ये कांग्रेस के राजनीतिक सवाल हैं; सीमा पर प्रत्येक स्थान की मौजूदा स्थिति का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
गलवान के बाद फिर सीमा सुरक्षा पर चर्चा
जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई। अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख में गश्त और सैनिकों की वापसी को लेकर सहमति बनी थी।
अब अरुणाचल प्रदेश से सामने आई खबरों ने सीमा पर गश्त, आपसी विश्वास और तनाव कम करने की व्यवस्था को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं।
इन सवालों के जवाब का इंतजार
सीमा पर मौजूदा घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट होना बाकी है कि किन स्थानों पर सैनिक आमने-सामने आए, भारतीय सैनिकों की गश्त पर कितना प्रभाव पड़ा और सैन्य बैठकों के बाद स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इन सवालों पर आधिकारिक और विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही सीमा पर वास्तविक स्थिति का स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।
स्रोत: ITBP प्रमुख का बयान, विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया तथा राष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टें।




