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छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग उपार्जन आदेश-2016 की उड़ रहीं धज्जियां, खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

कवर्धा। कबीरधाम जिले में धान खरीदी वर्ष 2025-26 के दौरान उपार्जन केंद्रों से धान गायब होने के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में नजर आ रही है। युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश-2016 के प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, लेकिन विभाग संबंधित मिलरों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण देने में लगा हुआ है।

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने बताया कि उपार्जन आदेश-2016 के नियम-06 के तहत मिलरों को अनुसूची-1 (क), अनुसूची-1 (ख) और अनुसूची-2 का रिकॉर्ड तैयार कर खाद्य विभाग में जमा करना अनिवार्य है। इसके बावजूद विभाग के पास इन अभिलेखों का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि विभागीय उदासीनता और कथित कमीशनखोरी के कारण नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है।

आकाश केशरवानी ने कहा कि नियमों की अनदेखी से न केवल उपार्जन व्यवस्था की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है, बल्कि धान गायब होने जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी विभाग की है, तब लगातार सामने आ रही अनियमितताओं पर विभाग की चुप्पी आखिर क्यों है।

छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश-2016 के खंड-6 के अनुसार प्रत्येक राइस मिलर के लिए धान स्टॉक रजिस्टर संधारित करना अनिवार्य है। इसमें प्रारंभिक स्टॉक, खरीदे गए धान की मात्रा, मिलिंग में उपयोग किए गए धान, शेष स्टॉक तथा अधिकृत अधिकारियों के हस्ताक्षर दर्ज होना जरूरी है। जानकारों का मानना है कि नियमित स्टॉक सत्यापन से धान की उपलब्धता और मिलिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है, लेकिन जिले में नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

इसी तरह आदेश के तहत चावल स्टॉक रजिस्टर का संधारण भी अनिवार्य किया गया है, जिसमें चावल का प्रारंभिक स्टॉक, प्राप्त मात्रा, विक्रय अथवा परिदान और शेष स्टॉक का पूरा विवरण दर्ज किया जाना आवश्यक है। इसके साथ निरीक्षण अधिकारियों के हस्ताक्षर भी अनिवार्य हैं, ताकि वास्तविक स्टॉक और रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा सके।

उपार्जन आदेश-2016 के तहत प्रत्येक मिलर को मासिक विवरणी प्रस्तुत करना भी जरूरी है। इसमें धान और चावल के आरंभिक एवं अंतिम स्टॉक, मिलिंग की मात्रा, प्राप्त चावल, परिदान किए गए चावल और बिजली खपत तक का पूरा विवरण देना होता है। संबंधित माह के बिजली बिल की प्रति संलग्न करना भी अनिवार्य है, जिससे उत्पादन क्षमता और वास्तविक मिलिंग गतिविधियों का सत्यापन किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्टॉक रजिस्टर, मासिक विवरणियों और बिजली खपत के आंकड़ों की नियमित जांच की जाए तो धान और चावल के स्टॉक में होने वाली अनियमितताओं का आसानी से खुलासा हो सकता है। इसके बावजूद विभागीय निगरानी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया कि धान खरीदी वर्ष 2025-26 के दौरान उपार्जन केंद्रों और राइस मिलों से बड़े पैमाने पर धान की रीसायकलिंग की गई है। उन्होंने दावा किया कि 5 फरवरी को रबेली-जेवड़न रोड स्थित एक राइस मिल से जेवड़न खुर्द उपार्जन केंद्र में अवैध रूप से धान खपाने की शिकायत विभाग को दी गई थी, लेकिन आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अन्य राज्यों बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से चावल लाकर जिले में खपाया जा रहा है, लेकिन विभाग इस पूरे मामले में मौन बना हुआ है। शिकायतों के बावजूद संबंधित उपार्जन केंद्र प्रभारियों और मिलरों पर कार्रवाई नहीं होने से विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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