भोरमदेव-चिल्फी के जंगल में ‘बाघ की दहाड़’: कैमरा ट्रैप में कैद हुआ शिकार करता नर बाघ, गांवों में दहशत

बरेंडीपानी के पास मवेशी का शिकार; वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी, ग्रामीणों को अकेले जंगल नहीं जाने की सलाह
कवर्धा। भोरमदेव-चिल्फी के जंगलों में एक बार फिर बाघ की दहाड़ सुनाई दे रही है। कबीरधाम के चिल्फी वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। बरेंडीपानी गांव के पास एक नर बाघ द्वारा मवेशी का शिकार किए जाने के बाद वन विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। खास बात यह है कि मवेशी का शिकार करते हुए बाघ कैमरा ट्रैप में कैद हुआ है। इसके बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।
पहले दहाड़ सुनाई दी, अब कैमरे ने कर दी पुष्टि
ग्रामीणों के मुताबिक बाघ की गतिविधियां पिछले कुछ समय से क्षेत्र में देखी जा रही थीं। कई बार जंगल और गांव के आसपास से बाघ की दहाड़ सुनाई देने की बात भी सामने आई।
अब बरेंडीपानी इलाके में मवेशी के शिकार और कैमरा ट्रैप में बाघ की तस्वीर सामने आने के बाद इसकी मौजूदगी पर कोई संदेह नहीं रह गया है।
कवर्धा डीएफओ निखिल अग्रवाल ने भी बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है। उनके अनुसार बरेंडीपानी कान्हा से लगा क्षेत्र है और इस इलाके में बाघों की आवाजाही होती रही है।
मवेशी बना बाघ का शिकार
ताजा घटना बरेंडीपानी गांव के आसपास की है। यहां एक नर बाघ ने मवेशी का शिकार किया। वन विभाग ने इलाके में कैमरा ट्रैप लगाए हैं और इसी निगरानी के दौरान बाघ शिकार करते हुए कैमरे में रिकॉर्ड हुआ।
मवेशी के शिकार की घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। जंगल से सटे गांवों में लोग अब मवेशियों को चराने के लिए जंगल जाने से भी डर रहे हैं।
जंगल जाने वालों को वन विभाग की चेतावनी
बाघ की पुष्टि के बाद वन विभाग ने आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की है।
डीएफओ ने ग्रामीणों से कहा है कि वे अनावश्यक रूप से सुबह बहुत जल्दी या देर रात जंगल की ओर अकेले न जाएं। पर्याप्त रोशनी रखें, समूह में जाएं और सतर्कता के लिए डंडा साथ रखने की सलाह दी गई है।
वन विभाग ने बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इलाके में अतिरिक्त कैमरा ट्रैप भी लगाए हैं।
कान्हा से भोरमदेव तक बाघों का कॉरिडोर
भोरमदेव-चिल्फी का जंगल बाघों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। सरकारी जानकारी के अनुसार 352 वर्ग किलोमीटर में फैला भोरमदेव अभयारण्य कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और अचानकमार टाइगर रिजर्व के बीच महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे के रूप में जुड़ा हुआ है।
डीएफओ के मुताबिक चिल्फी क्षेत्र पहले कान्हा के बफर जोन से जुड़ा रहा है और यहां बाघों की आवाजाही होती रही है।
यही वजह है कि भोरमदेव और चिल्फी के जंगलों में बाघों की मौजूदगी वन विभाग के लिए नई बात नहीं है। लेकिन जब बाघ जंगल से निकलकर गांवों के करीब पहुंचता है और मवेशियों का शिकार करता है, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है।
भोरमदेव में बाघ परिवार की भी मौजूदगी
वन विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से भोरमदेव अभयारण्य में बाघ-बाघिन के एक परिवार की गतिविधियां भी सामने आती रही हैं। दो शावकों के साथ इस परिवार की मौजूदगी की बात सामने आई थी और अब शावक भी बड़े हो चुके हैं।
ऐसे में क्षेत्र में बाघों की लगातार मौजूदगी को लेकर वन विभाग की निगरानी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
ग्रामीणों के सामने दोहरी चिंता
एक तरफ जंगल में बाघ की मौजूदगी क्षेत्र की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत है, वहीं दूसरी ओर जंगल से लगे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए यह चिंता का विषय भी है।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता मवेशियों की सुरक्षा और जंगल में आने-जाने को लेकर है। यदि बाघ लगातार गांवों के आसपास सक्रिय रहता है तो वन विभाग को कैमरा ट्रैप के साथ-साथ नियमित गश्त और ग्रामीणों को समय पर सूचना देने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।
फिलहाल निगरानी बढ़ी, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
बरेंडीपानी में मवेशी के शिकार के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। कैमरा ट्रैप के जरिए बाघ की गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है।
फिलहाल वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे बाघ की मौजूदगी वाले क्षेत्र में अकेले न जाएं, रात में जंगल की ओर न निकलें और बाघ दिखाई देने पर उसके करीब जाने या उसे उकसाने की कोशिश न करें।
भोरमदेव-चिल्फी के जंगल में कैमरा ट्रैप में कैद हुई ‘शिकार करते बाघ’ की तस्वीर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मैकल की इन पहाड़ियों में जंगल का असली राजा सक्रिय है। अब चुनौती यह है कि बाघ भी सुरक्षित रहे और जंगल से लगे गांवों के लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।



