NEET प्रदर्शन के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: देशभर में दर्ज FIR रद्द; 2,873 गंभीर अपराध वाले लोगों पर कार्रवाई की छूट

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। यह फैसला दिल्ली समेत कई राज्यों में दर्ज मामलों पर लागू होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि इन मामलों को लंबा खींचने से बड़ी संख्या में छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
2,873 लोगों पर अलग से कार्रवाई की अनुमति
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रदर्शनकारियों को पूरी तरह राहत नहीं दी है। कोर्ट ने सरकार को 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ अलग FIR दर्ज करने/कानूनी कार्रवाई की अनुमति दी है, जिनकी गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि बताई गई है।
यानी सामान्य छात्र प्रदर्शन में शामिल लोगों और गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल आरोपियों के बीच अंतर किया गया है।
जुलाई में हुआ था देशव्यापी प्रदर्शन
NEET पेपर लीक के मुद्दे को लेकर 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच देश के कई हिस्सों में छात्रों ने प्रदर्शन किया था। दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद की ओर मार्च के दौरान भी बड़ी संख्या में छात्र जुटे थे।
प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव और हिंसा के आरोप भी लगे थे। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में FIR दर्ज की गई थीं।
केंद्र और चार राज्यों ने मांगी थी FIR रद्द करने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के साथ बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम की सरकारों ने भी छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR को समाप्त करने की मांग की थी। LiveLaw के अनुसार चार राज्यों ने कुल 116 FIRs से संबंधित राहत की मांग की थी।
इससे पहले केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस की 13 FIR रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इनमें दंगा, हत्या के प्रयास, लूट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ी धाराएं भी शामिल थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में FIR पर भी लगाई रोक
फैसले का एक अहम हिस्सा यह है कि उसी घटना और उन्हीं छात्र प्रदर्शनों को लेकर भविष्य में नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
हालांकि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गुंजाइश बरकरार रखी गई है।
5 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन भी वापस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छात्र संगठन की ओर से 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने की घोषणा की गई। संगठन के नेता सौरव दास ने कोर्ट में बताया कि केंद्र की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदर्शन वापस लिया जा रहा है।
पुलिस कार्रवाई की भी होगी जांच
छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों पर कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप भी लगे थे। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी गठित की थी। कमेटी को पुलिस/सुरक्षा बलों के बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों की हिंसा दोनों पहलुओं की जांच करनी है।



