मजदूरों के नाम 10 फर्जी फर्में, 150 करोड़ का कारोबार दिखाकर 24 करोड़ की ITC का दावा

रायपुर। राजधानी रायपुर में जीएसटी फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि दिहाड़ी मजदूरों, सफाईकर्मियों, इलेक्ट्रिशियनों और फेरीवालों के नाम पर 10 फर्जी फर्में बनाकर करीब 150 करोड़ रुपए का कथित बोगस कारोबार दिखाया गया। इस नेटवर्क के जरिए 24 करोड़ रुपए से अधिक की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का कथित फर्जी दावा किए जाने की जांच शुरू हो गई है।
मामले में जीएसटी अधिकारियों की शिकायत के बाद तेलीबांधा थाना पुलिस ने रायपुर के लभांडी स्थित एम. अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ फर्जीवाड़ा और अमानत में खयानत सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
जांच में फर्मों का भौतिक सत्यापन
जांच अधिकारियों ने जब कागजों में दर्ज फर्मों के पते का भौतिक सत्यापन किया, तो कथित तौर पर वहां कोई भी फर्म संचालित नहीं मिली। पुलिस के अनुसार, मजदूरों और छोटे कामगारों के नाम पर फर्मों का पंजीयन कराया गया और उनके माध्यम से कागजों में करोड़ों रुपए का कारोबार दर्शाया गया।
आरोप है कि संबंधित कारोबारी ने 30 से अधिक व्यापारियों को बिना बिल यानी कच्चे में माल बेचा। इसके बाद अस्तित्वहीन फर्मों के नाम पर बिल जारी किए गए। इन्हीं बिलों के आधार पर सरकार से करोड़ों रुपए की ITC का दावा किए जाने की आशंका है।

अब पुलिस उन कारोबारियों की भी जानकारी जुटा रही है, जिन्होंने कथित तौर पर इस नेटवर्क के जरिए माल खरीदा या किसी प्रकार का अनुचित लाभ उठाया।
चाय बेचने और मजदूरी करने वालों के नाम पर फर्में
जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, कई ऐसे लोगों के नाम पर फर्में बनाई गईं, जिनका वास्तविक कारोबार बेहद छोटा था या जो नियमित मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं।
- मजहर खान, गरियाबंद निवासी, पूर्व में फेरी लगाने का काम करते थे और वर्तमान में इलेक्ट्रिशियन हैं। उनके नाम पर मेसर्स यूनिक इंटरप्राइजेस बनाई गई।
- अफजल अंसारी, रायपुर के बैजनाथपारा निवासी, पार्किंग में मासिक वेतन पर काम करते हैं। उन्हें मेसर्स अंसारी ट्रेडर्स का संचालक दर्शाया गया।
- विकास यदु, महादेवघाट रोड रायपुरा निवासी, चाय का ठेला लगाते हैं। उनके नाम पर मेसर्स अगस्त इंटरप्राइजेस का पंजीयन कराया गया।
- प्रताप सिंह वर्मा, दुर्ग के पाटन निवासी, दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। उनके नाम पर मेसर्स विनायक वेंचर्स बनाई गई।
- महेश फकीरा सोनी, बिलासपुर के कोनी निवासी सफाईकर्मी हैं। उन्हें मेसर्स महावीर इंटरप्राइजेस का मालिक दर्शाया गया।
- कुलेश्वर नौरंगे, सेजबहार निवासी, के नाम पर मेसर्स जय भोले इंटरप्राइजेस का पंजीयन कराया गया।
मृत व्यक्ति के नाम पर किरायानामा
जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। हुसैनी इंटरप्राइजेस के नाम से तैयार किरायानामे में मकान मालिक के रूप में फूल सिंह का नाम दर्ज था। रिपोर्ट के अनुसार, फूल सिंह की मृत्यु वर्ष 2010 में हो चुकी थी, जबकि किरायानामा 21 मार्च 2025 को निष्पादित होना दर्शाया गया है।
इस फर्म के प्रोपराइटर मोहम्मद इस्लाम बताए गए हैं, जो भिलाई में चूड़ी की दुकान चलाते हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि किरायानामा किसने तैयार कराया और दस्तावेजों में मृत व्यक्ति का नाम कैसे इस्तेमाल हुआ।
ITC के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान का आरोप
जीएसटी व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ वास्तविक खरीद और वैध बिलों के आधार पर लिया जाता है। आरोप है कि फर्जी फर्मों और कागजी लेनदेन के जरिए ऐसी खरीद-बिक्री दर्शाई गई, जो वास्तविकता में हुई ही नहीं।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ फर्जी बिलिंग नेटवर्क के माध्यम से अन्य कारोबारियों को भी अनुचित कर लाभ पहुंचाने का मामला बन सकता है।
फिलहाल पुलिस और जीएसटी विभाग संबंधित फर्मों, दस्तावेजों, बैंक खातों, बिलों और लेनदेन की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही कथित फर्जीवाड़े की वास्तविक राशि और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।





