झीरम पर प्रदेशभर में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस: ‘10 दोषियों से पूरा सच सामने नहीं आया’, बड़े नक्सली नेताओं और कथित साजिश की जांच की मांग

रायपुर/कवर्धा। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में NIA की विशेष अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद कांग्रेस ने जांच और फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं। 7 सितंबर को प्रदेश के जिला मुख्यालयों में कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झीरम मामले की जांच को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मामले में छोटे स्तर के नक्सलियों को दोषी ठहराया गया, जबकि बड़े नक्सली नेताओं और कथित मुख्य साजिशकर्ताओं की भूमिका की जांच पर्याप्त रूप से नहीं हुई।
कवर्धा में जिला कांग्रेस अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने प्रेस वार्ता कर NIA की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नक्सलियों ने बाद में आत्मसमर्पण किया, उनके नाम झीरम घाटी नरसंहार से हटाए गए और इसके बाद ही संबंधित नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। कांग्रेस ने ऐसे सभी पहलुओं की दोबारा निष्पक्ष जांच की मांग की।
कवर्धा में नवीन जायसवाल बोले- बड़े नक्सलियों को बचाने का आरोप
जिला कांग्रेस अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने कहा कि NIA कोर्ट के फैसले में 10 लोगों को दोषी ठहराया गया है, लेकिन कांग्रेस इस फैसले से संतुष्ट नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में छोटे नक्सलियों को दोषी ठहराया गया, जबकि बड़े नक्सली नेताओं को बचाने का प्रयास किया गया।
नवीन जायसवाल ने कहा कि जिन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, उनके नाम झीरम घाटी नरसंहार से हटाए जाने को लेकर भी सवाल हैं। उनका आरोप है कि नाम हटाए जाने के बाद ही संबंधित नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
कांग्रेस ने मांग की कि झीरम मामले में पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान को गंभीरता से लिया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से दोबारा जांच कराई जाए।
पूर्व विधायक ममता चंद्राकर ने बड़े नक्सली नेताओं से पूछताछ की मांग की
कवर्धा की प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक ममता चंद्राकर ने भी झीरम घाटी मामले में बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि जिन बड़े नक्सली नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है, उनसे भी झीरम घाटी हत्याकांड के संबंध में पूछताछ की जानी चाहिए। यदि जांच में उनकी संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी होनी चाहिए।
कांग्रेस का सवाल- क्या 10 दोषियों से पूरी साजिश सामने आ गई?
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि झीरम घाटी नरसंहार में केवल उन लोगों को दोषी ठहराना पर्याप्त नहीं है, जिन्होंने घटना को अंजाम देने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई। पार्टी का दावा है कि घटना के पीछे मौजूद बड़े नक्सली नेतृत्व, कथित साजिश और अन्य सहयोगियों की भूमिका भी सामने आनी चाहिए।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से झीरम मामले को लेकर क्या पर्याप्त पूछताछ हुई? यदि हुई तो उसके आधार पर क्या तथ्य सामने आए? और यदि किसी का नाम जांच से हटाया गया तो उसका आधार क्या था?
प्रदेशभर में एक साथ कांग्रेस का हमला
7 सितंबर को कांग्रेस ने प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर झीरम मामले को लेकर NIA की जांच पर सवाल उठाए। अलग-अलग जिलों में स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने प्रेस वार्ता के जरिए कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान है, लेकिन झीरम घाटी नरसंहार से जुड़े सभी पहलुओं की जांच अभी बाकी है।
कांग्रेस नेताओं ने बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से पूछताछ और घटना के कथित व्यापक षड्यंत्र की जांच की मांग उठाई।
16 सितंबर को सजा पर फैसला
झीरम घाटी मामले में NIA की विशेष अदालत ने 5 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अब दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा पर 16 सितंबर को फैसला होना है।
एक ओर अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं भाजपा और सरकार की ओर से कांग्रेस से यह सवाल पूछा जा रहा है कि यदि उसके पास झीरम मामले में बड़े साजिशकर्ताओं से जुड़े ठोस सबूत थे, तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने क्यों नहीं रखा गया।
अब झीरम घाटी मामला एक बार फिर कानूनी फैसले के साथ-साथ राजनीतिक बहस के केंद्र में है। कांग्रेस जहां पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पुनःजांच की मांग कर रही है, वहीं सरकार अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आए फैसले को महत्वपूर्ण बता रही है।



