छत्तीसगढ़ प्रादेशिक

बस्तर के जंगलों में अब डिजिटल शिकंजा: शिकार से अवैध कटाई तक हर वन अपराध ऑनलाइन ट्रैक होगा

POR ऐप में दर्ज होगी FIR जैसी पूरी कार्रवाई; अपराध दर्ज होने से चालान तक अफसर ऑनलाइन देख सकेंगे केस की प्रगति

जगदलपुर। बस्तर के घने जंगलों में होने वाले शिकार, अवैध कटाई और वन्यजीव अपराधों पर अब डिजिटल निगरानी रखी जाएगी। वन विभाग ने वन अपराधों की कार्रवाई को ऑनलाइन मॉनिटर करने के लिए POR (Primary Offence Report) ऐप की शुरुआत की है। अब जंगल में अपराध दर्ज होने के बाद उसकी जांच कहां तक पहुंची, क्या कार्रवाई हुई और न्यायालय में चालान पेश हुआ या नहीं—इन तमाम प्रक्रियाओं की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वन रक्षक से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक किसी मामले की प्रगति को एक ही सिस्टम पर देखा जा सकेगा। यानी किसी वन अपराध की फाइल अब सिर्फ कागजों में दबकर नहीं रहेगी, बल्कि उसकी डिजिटल एंट्री और आगे की कार्रवाई भी ट्रैक की जा सकेगी।

जंगल में अपराध हुआ तो अब रिकॉर्ड भी बनेगा डिजिटल

वन विभाग के अनुसार, वन अपराध सामने आने पर प्राथमिक वन अपराध रिपोर्ट यानी POR दर्ज करने से लेकर जांच और आगे की कार्रवाई तक की जानकारी ऑनलाइन अपडेट की जाएगी।

वन रक्षक द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों के स्तर पर ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। जांच अधिकारी द्वारा मामले में की जा रही कार्रवाई और उसकी प्रगति भी सिस्टम में दर्ज की जा सकेगी।

वरिष्ठ अधिकारी जरूरत के अनुसार किसी मामले को ऑनलाइन देखकर यह पता लगा सकेंगे कि जांच किस स्तर पर है और कार्रवाई में कितना काम हुआ है।

शिकार और वन्यजीव अपराध पर खास नजर

बस्तर के जंगल वन्यजीवों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। यहां होने वाले शिकार और वन्यजीव अपराधों में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है।

अब ऐसे मामलों में भी POR ऐप के जरिए कार्रवाई की प्रगति को डिजिटल तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा।

यानी शिकार की घटना से लेकर अपराध दर्ज करने, जांच, साक्ष्य जुटाने और न्यायालय में चालान पेश करने तक की प्रक्रिया का रिकॉर्ड सिस्टम में रहेगा।

चार वनमंडल और दो संरक्षित क्षेत्रों के अमले को ट्रेनिंग

POR ऐप के इस्तेमाल को लेकर जगदलपुर स्थित वन विद्यालय में वृत्तस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बस्तर संभाग के वन अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐप के माध्यम से वन अपराध दर्ज करने और उसकी प्रगति अपडेट करने की प्रक्रिया समझाई गई।

प्रशिक्षण में बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा वनमंडल के साथ कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।

अफसरों की नजर से नहीं छूटेगा लंबित केस

अभी वन अपराधों में कार्रवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात होती है कि अपराध दर्ज होने के बाद जांच किस गति से आगे बढ़ रही है।

डिजिटल सिस्टम आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को लंबित मामलों की जानकारी रखने में आसानी होगी। किसी केस में जांच अटकी है या कार्रवाई आगे बढ़ी है, इसका रिकॉर्ड ऑनलाइन देखा जा सकेगा।

इससे वन अपराधों के मामलों की निगरानी, रिकॉर्ड-मेंटेनेंस और समीक्षा को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अवैध कटाई पर भी नजर

POR ऐप का इस्तेमाल सिर्फ वन्यजीव अपराध तक सीमित नहीं रहेगा। जंगल में होने वाले अन्य वन अपराध, जिसमें अवैध कटाई जैसे मामले भी शामिल हैं, उनकी कार्रवाई को भी डिजिटल रिकॉर्ड में लाने का उद्देश्य है।

छत्तीसगढ़ वन विभाग पहले से ही वन अपराधों की रोकथाम के लिए निगरानी व्यवस्था संचालित करता है और वन अपराध की सूचना के लिए टोल-फ्री नंबर भी उपलब्ध कराता है।

अब POR ऐप के जरिए मैदानी स्तर पर दर्ज होने वाले अपराध और अधिकारियों की निगरानी के बीच डिजिटल कड़ी मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

बस्तर में बढ़ रही हाईटेक वन निगरानी

वन अपराधों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब बस्तर के जंगलों में वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर निगरानी लगातार मजबूत की जा रही है। इससे पहले वन विभाग ने बस्तर के जंगलों की हाईटेक निगरानी के लिए थर्मल ड्रोन के इस्तेमाल की जानकारी भी दी थी, जिससे रात में भी वन्यजीवों की सुरक्षा, अवैध कटाई और शिकार पर नजर रखने का उद्देश्य है।

अब मैदान में निगरानी और दफ्तर में केस मॉनिटरिंग—दोनों को तकनीक से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

अब सवाल कार्रवाई की रफ्तार का

POR ऐप से रिकॉर्ड ऑनलाइन होने के बाद असली चुनौती यह होगी कि दर्ज मामलों में जांच और कार्रवाई कितनी तेजी से होती है। डिजिटल सिस्टम अधिकारियों को केस की स्थिति दिखा सकता है, लेकिन जंगल में अपराध रोकने के लिए मैदानी कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी होगी।

फिलहाल वन विभाग की यह पहल बस्तर के जंगलों में वन अपराधों के रिकॉर्ड और निगरानी को कागजी प्रक्रिया से डिजिटल सिस्टम की ओर ले जाने वाला बड़ा कदम मानी जा रही है।

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