छत्तीसगढ़ में 3 बाघों के शिकार का मामला: CBI जांच की सिफारिश, पुलिस इंटेलिजेंस से जुड़े लोगों तक पहुंची जांच

रायपुर। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर बाघों के शिकार और उनके अंगों की तस्करी का मामला अब और गंभीर हो गया है। छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने मामले की CBI जांच कराने की सिफारिश की है। जांच में तीन बाघों की खाल बरामद होने के साथ अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के संकेत मिले हैं।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मामले की तह तक पहुंचने और इसमें शामिल पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए CBI जांच की सिफारिश की गई है। विभाग को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों के साथ संभवतः अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हो सकते हैं।
3 बाघों की खाल मिली, 9 आरोपी गिरफ्तार
मामले की शुरुआत 29 जून को हुई, जब छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान दो बाघों की खाल बरामद की गई। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो 5 जुलाई को इंद्रावती नदी के पास तीसरी बाघ की खाल भी मिली।
जांच में अब तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। संदिग्धों के ठिकानों से शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे, चाकू, बाघों के पंजे और दांत भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस इंटेलिजेंस कनेक्शन से बढ़ी जांच की गंभीरता
मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी है। रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में एक व्यक्ति गड़चिरोली पुलिस की स्पेशल ब्रांच के इंटेलिजेंस सेल में पदस्थ पुलिसकर्मी था, जबकि दूसरा पुलिस का गोपनीय सूचना तंत्र से जुड़ा व्यक्ति बताया गया।
इसी कनेक्शन और अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका के बाद मामले को केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की जरूरत महसूस की गई।
वन विभाग ने जुलाई में भेजा था प्रस्ताव
वन विभाग ने 27 जुलाई को राज्य के गृह विभाग को पत्र भेजकर CBI जांच की मांग की थी। अब वन मंत्री केदार कश्यप ने भी स्पष्ट किया है कि मामले की व्यापकता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसी से जांच जरूरी है।
मंत्री के अनुसार, मानसून के दौरान सीमावर्ती गांवों में तलाशी अभियान भी चलाया गया, ताकि बाघ शिकार की अन्य घटनाओं का पता लगाया जा सके। हालांकि इस अभियान में कोई नया शिकार मामला सामने नहीं आया।
इंद्रावती के जंगल से महाराष्ट्र तक फैला संदिग्ध नेटवर्क
जांच एजेंसियों को संदेह है कि बाघों की खाल और अंगों की तस्करी करने वाला नेटवर्क छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा के जंगलों का इस्तेमाल कर रहा था। इंद्रावती, अबूझमाड़ और गड़चिरोली का विशाल वन क्षेत्र वन्यजीवों के आवागमन के लिहाज से भी संवेदनशील माना जाता है।
इसी वजह से जांच केवल स्थानीय शिकारियों तक सीमित नहीं रखी जा रही। अब सवाल यह है कि तीन बाघों का शिकार किसने किया, खाल और अंग कहां भेजे जाने थे और इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं?
इन सवालों के जवाब के लिए अब CBI जांच की सिफारिश की गई है।



