आरक्षण की समीक्षा और आर्थिक आधार को महत्व देने की मांग, 20 समाजों के प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे

कवर्धा। आरक्षण व्यवस्था में सुधार और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को समान अवसर देने की मांग को लेकर शुक्रवार को कवर्धा में सवर्ण समाज के नेतृत्व में 20 समाजों के प्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों का विरोध करना नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय और समान अवसर का संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर इसे समयानुकूल बनाने की मांग की।
ज्ञापन में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, फीस में राहत, छात्रावास सुविधा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने की मांग की गई। समाज का कहना है कि आर्थिक कमजोरी किसी भी विद्यार्थी के भविष्य में बाधा नहीं बननी चाहिए।
प्रतिनिधियों ने आरक्षण और उससे जुड़ी सुविधाओं के लाभार्थियों की भी समय-समय पर समीक्षा करने की मांग रखी। उनका कहना है कि जो परिवार लंबे समय से आरक्षण का लाभ लेकर सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो चुके हैं, उनके संबंध में लाभ की निरंतरता की समीक्षा के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू आरक्षण संबंधी प्रावधानों के मूल्यांकन तथा सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रभावों के अध्ययन के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई।
ज्ञापन में सभी सामाजिक वर्गों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक संवाद की भी मांग की गई है। प्रतिनिधियों ने कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर किसी टकराव के बजाय संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा होनी चाहिए।
राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन की प्रतियां प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी भेजी गई हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि सरकार सभी पक्षों को साथ लेकर आरक्षण व्यवस्था और समान अवसर से जुड़े मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श करेगी।



