छत्तीसगढ़ प्रादेशिक

“सरकारी अस्पताल में इंतजार… निजी क्लिनिक में इलाज?” हनोदा के डॉक्टर पर गंभीर आरोप, कलेक्टर तक पहुंची शिकायत

दुर्ग। सरकारी अस्पताल की ओपीडी में मरीज डॉक्टर का इंतजार करते रहे, लेकिन आरोप है कि उसी समय डॉक्टर अपने निजी क्लिनिक में मरीज देख रहे थे। दुर्ग जिले के हनोदा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. श्रीशांत दुबे को लेकर ग्रामीणों ने ऐसे ही गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब केवल अनुपस्थिति का नहीं, बल्कि सरकारी सेवा के दौरान निजी प्रैक्टिस करने के आरोप तक पहुंच गया है। इसकी लिखित शिकायत कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को भी सौंपे जाने का दावा किया गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि डॉ. दुबे अक्सर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पहली पाली में उपस्थिति दर्ज कराते हैं, लेकिन दोपहर बाद अस्पताल से अनुपस्थित रहते हैं। इस दौरान अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है और स्टाफ उनके आने का इंतजार करने की बात कहता रहता है। कई मरीजों को घंटों इंतजार के बाद बिना उपचार लौटना पड़ता है।

इसी बीच स्थानीय लोगों ने पड़ताल की तो दावा किया कि डॉक्टर बोरसी स्थित अपने निजी क्लिनिक में मरीजों का इलाज करते हैं। बताया गया कि वहां “डॉ. एस.एस. दुबे” नाम से बोर्ड लगा हुआ है और निजी प्रैक्टिस का समय भी प्रदर्शित किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निजी क्लिनिक का यह समय सरकारी अस्पताल की ड्यूटी अवधि से मेल खाता है, जिससे सरकारी सेवा प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में चिकित्सक का निर्धारित समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक है। नियमों के अनुसार यदि निजी प्रैक्टिस की अनुमति हो भी, तो वह सरकारी ड्यूटी समाप्त होने के बाद ही की जा सकती है। आरोप है कि यदि ड्यूटी समय के दौरान निजी क्लिनिक संचालित किया जा रहा है, तो यह सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।

शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि डॉ. दुबे के कार्य व्यवहार को लेकर पहले भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। उनका कहना है कि मामला सीधे ग्रामीणों की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा है, इसलिए स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि आरोप सही हैं, तो क्या सरकारी अस्पताल का समय निजी क्लिनिक की भेंट चढ़ रहा है? इस पूरे मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल शिकायतों के आधार पर ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

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