छत्तीसगढ़ प्रादेशिक

स्टे लेकर हटाया गया सरपंच फिर नहीं संभाल सकता कुर्सी, हाईकोर्ट ने कहा- अंतरिम आदेश से पुरानी स्थिति बहाल नहीं होती

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरपंचों के लिए अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि पद से हटाए जा चुके सरपंच को केवल अंतरिम स्टे के आधार पर दोबारा कुर्सी पर नहीं बैठाया जा सकता। अगर हटाने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है और उसकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को जिम्मेदारी भी दी जा चुकी है, तो बाद में मिला अंतरिम आदेश उस स्थिति को अपने आप नहीं बदल सकता।

मामला ग्राम पंचायत मढ़ईभाठा का है। पंचायत के कुछ पंचों ने सरपंच पर पंचायत की राशि के कथित गलत इस्तेमाल और फर्जी प्रस्ताव के जरिए राशि निकालने जैसे आरोप लगाए थे। जांच के बाद सक्षम अधिकारी ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंच को पद से हटा दिया। साथ ही छह साल तक पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य भी किया गया।

सरपंच को हटाए जाने के बाद पंचायत में कामकाज चलाने के लिए दूसरे व्यक्ति को अस्थायी सरपंच बनाया गया और उसने पद संभाल भी लिया। इसके बाद हटाए गए सरपंच ने राहत के लिए आवेदन किया। कलेक्टर ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में कमिश्नर ने हटाने के आदेश पर 30 दिन के लिए रोक लगा दी।

यहीं से विवाद बढ़ा। हाईकोर्ट ने माना कि जब सरपंच को पहले ही पद से हटाया जा चुका है और दूसरे व्यक्ति ने उसका प्रभार संभाल लिया है, तब बाद में मिला अंतरिम स्टे उसे वापस उसी पद पर बैठाने का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट के मुताबिक स्टे किसी आदेश की आगे की कार्रवाई रोक सकता है, लेकिन पहले से पूरी हो चुकी कार्रवाई को उलटकर पुरानी स्थिति बहाल करने के लिए उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कमिश्नर का अंतरिम आदेश रद्द कर दिया और कलेक्टर के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें अंतरिम राहत देने से इनकार किया गया था। हालांकि कोर्ट ने सरपंच को हटाने के पीछे लगे आरोप सही हैं या गलत, इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। मूल मामले का फैसला संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।

आसान भाषा में समझें तो: अगर किसी सरपंच को कानून के तहत पद से हटा दिया गया और उसकी जगह दूसरा व्यक्ति जिम्मेदारी संभाल चुका है, तो सिर्फ “स्टे मिल गया” कहकर पुराना सरपंच वापस कुर्सी नहीं संभाल सकता। उसे मामले में अंतिम कानूनी राहत हासिल करनी होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button

Discover more from THE PUBLIC NEWS

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading