PM आवास पर भूपेश-विजय आमने-सामने, 80 मिनट चली बहस; बाहर भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ता भिड़े, पुलिस से झड़प में SI के बटन टूटे

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़ों को लेकर चल रही सियासी खींचतान मंगलवार को रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने की बहस तक पहुंच गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा करीब 80 मिनट तक एक-दूसरे के सामने रहे। दोनों ने अपने-अपने कार्यकाल के आंकड़े रखे और स्वीकृत, लंबित तथा पूर्ण हुए आवासों के साथ केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल-जवाब किए।
बहस खत्म होने के बाद मामला सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं रहा। प्रेस क्लब के बाहर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी, नारेबाजी और धक्का-मुक्की हुई। स्थिति संभालने पहुंची पुलिस के साथ भी झड़प की जानकारी सामने आई है। कई रिपोर्टों के मुताबिक इस दौरान एक सब-इंस्पेक्टर की शर्ट का बटन और बैज टूट गया।
चुनौती के बाद आमने-सामने आए दोनों नेता
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर पिछले दिनों भूपेश बघेल और विजय शर्मा के बीच बयानबाजी चल रही थी। इसी दौरान विजय शर्मा ने बघेल को योजना के आंकड़ों पर सार्वजनिक बहस की चुनौती दी थी। बघेल ने चुनौती स्वीकार की और मंगलवार को रायपुर प्रेस क्लब में दोनों नेता आमने-सामने बैठे।
बहस का मुख्य मुद्दा यही रहा कि छत्तीसगढ़ में अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में कितने मकान स्वीकृत हुए, कितने पूरे हुए, कितने लंबित रहे और केंद्र से राशि तथा लक्ष्य किस तरह मिले।
बघेल ने कहा- कांग्रेस सरकार में करीब 7 लाख आवास स्वीकृत
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल का पक्ष रखते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान करीब 6.97 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे।
उन्होंने 2018-19 में स्वीकृत और पूर्ण आवासों के आंकड़े भी सामने रखे। बघेल का कहना था कि कोरोना काल में वित्तीय स्थिति कठिन थी और केंद्र से राशि को लेकर राज्य का विवाद रहा। उन्होंने दावा किया कि 2022-23 में PM आवास का पोर्टल बंद था और उनकी सरकार ने केंद्र से राज्य की हिस्सेदारी/राशि को लेकर पत्राचार किया था।
बघेल ने 2011 की जनगणना के आधार पर आवास की जरूरत का आंकड़ा भी सामने रखा और कहा कि उनकी सरकार ने उपलब्ध पात्रता के आधार पर आवास स्वीकृत किए थे।
विजय शर्मा का पलटवार- ढाई साल में 11.51 लाख घर पूरे
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि PM आवास योजना का पोर्टल बंद होने की बात सही नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के आंकड़ों के आधार पर योजना की प्रगति देखी जानी चाहिए।
शर्मा ने दावा किया कि साय सरकार के करीब ढाई साल के कार्यकाल में 11.51 लाख प्रधानमंत्री आवास पूरे किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हाल में 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों को मंजूरी मिली है।
एक अन्य रिपोर्ट में शर्मा की ओर से यह दावा भी सामने आया कि 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने देश में सर्वाधिक PM आवास बनाए। उन्होंने पिछली सरकार के दौरान आवास निर्माण की गति और वित्तीय स्वीकृतियों पर भी सवाल उठाए।
18 लाख आवास का आंकड़ा बना बहस का केंद्र
पूरी बहस में 18 लाख आवास का आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार की ओर से जिन 18 लाख आवासों की बात कही जाती है, उनमें वास्तविक रूप से कितने नए आवास हैं और कितने पहले से लंबित या अलग-अलग श्रेणियों में शामिल हैं।
विजय शर्मा ने इसके जवाब में कहा कि 18 लाख का आंकड़ा केवल एक ही श्रेणी के नए मकानों का आंकड़ा नहीं है। उन्होंने इसमें पहले से लंबित आवास, स्थायी प्रतीक्षा सूची, आवास प्लस और मुख्यमंत्री आवास योजना से जुड़े आंकड़ों को शामिल बताया।
यही अंतर दोनों नेताओं के आंकड़ों की व्याख्या में बहस का मुख्य कारण बना।
पोर्टल बंद था या नहीं, इस पर भी टकराव
बहस में प्रधानमंत्री आवास योजना के पोर्टल का मुद्दा भी उठा।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि 2022-23 में पोर्टल बंद रहा और इसी वजह से आवास स्वीकृति की प्रक्रिया प्रभावित हुई। विजय शर्मा ने इसे खारिज करते हुए कहा कि कोरोना काल में भी योजना के तहत राशि और प्रक्रिया चल रही थी तथा समस्या को केवल पोर्टल बंद होने से जोड़ना सही नहीं है।
विजय शर्मा ने पूर्व मंत्री टीएस सिंहदेव के 2022 के इस्तीफे का भी उल्लेख किया और PM आवास के लिए राज्य को राशि नहीं मिलने को लेकर तत्कालीन सरकार पर सवाल उठाए। बघेल ने इसके जवाब में केंद्र से राशि नहीं मिलने और राज्य द्वारा किए गए पत्राचार का मुद्दा उठाया।
‘Grok से पूछिए’ भी चर्चा में रहा
बहस के दौरान आंकड़ों को लेकर विजय शर्मा ने बघेल से कहा कि सही जानकारी के लिए आंकड़ों की जांच की जाए। इसी क्रम में उनका “Grok से पूछिए” वाला बयान भी चर्चा में रहा।
बघेल ने जवाब में कहा कि कौन सही बोल रहा है, यह पत्रकार और जनता खुद देख सकती है। दोनों पक्षों ने बहस के बाद भी अपने-अपने आंकड़ों को सही बताया।
बहस खत्म होते ही बाहर भिड़े कार्यकर्ता
मंच पर करीब 80 मिनट तक चली बहस के बाद प्रेस क्लब के बाहर माहौल गरमा गया। भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पहले नारेबाजी और कहासुनी हुई। इसके बाद मामला धक्का-मुक्की और झड़प तक पहुंच गया।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भी धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक हंगामे में एक SI की शर्ट का बटन और बैज टूट गया।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस की ओर से इस मामले में दर्ज FIR, गिरफ्तारियों या अन्य कानूनी कार्रवाई की विस्तृत आधिकारिक जानकारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए इस हिस्से में आगे की पुलिस कार्रवाई की पुष्टि होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
बहस के बाद सोशल मीडिया पर भी वार-पलटवार
प्रेस क्लब की बहस खत्म होने के बाद राजनीतिक लड़ाई सोशल मीडिया तक पहुंच गई।
भूपेश बघेल ने विजय शर्मा पर निशाना साधते हुए तंज कसा और कहा कि अगली बार किसी “समझदार” व्यक्ति को भेजना चाहिए। भाजपा की ओर से भी पोस्टर और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पलटवार किया गया। दोनों पक्षों ने बहस में अपने पक्ष को मजबूत बताया।
असली विवाद आंकड़ों की व्याख्या का
PM आवास योजना पर हुई इस बहस में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। कांग्रेस का जोर उसके कार्यकाल में स्वीकृत आवास, केंद्र से राशि और पोर्टल से जुड़े विवाद पर है। वहीं भाजपा सरकार अपने कार्यकाल में पूरे हुए आवासों, नई स्वीकृतियों और लंबित आवासों को पूरा करने की गति को आधार बना रही है।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक बहस मुख्य रूप से स्वीकृत, लंबित और पूरे हो चुके मकानों तथा केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका पर केंद्रित रही। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए।
इसलिए 18 लाख, 11.51 लाख या करीब 7 लाख जैसे आंकड़ों को एक ही श्रेणी मानकर तुलना करना सही नहीं होगा। स्वीकृत, पूर्ण, लंबित और लक्ष्य—चारों अलग-अलग आंकड़े हैं।
बहस से सड़क तक पहुंचा सियासी विवाद
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही। मंगलवार को एक ही दिन में पहले प्रेस क्लब के मंच पर दोनों नेताओं की तीखी बहस हुई, फिर सोशल मीडिया पर बयान और पोस्टर वार शुरू हुआ और इसके बाद प्रेस क्लब के बाहर कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की स्थिति बनी।
इस पूरे घटनाक्रम ने PM आवास योजना के आंकड़ों को एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि योजना के आधिकारिक रिकॉर्ड में स्वीकृत, पूर्ण और लंबित आवासों की वास्तविक संख्या क्या है और अलग-अलग वर्षों में केंद्र तथा राज्य का योगदान कितना रहा।





