तारा कोल ब्लॉक पर सियासत तेज, बैज ने साय सरकार से पूछा- पहले रोक, अब नीलामी क्यों?

रायपुर। हसदेव-अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया है कि जब 2023 में तारा कोल ब्लॉक को नीलामी से बाहर रखने की पहल की गई थी, तो दिसंबर 2025 में इसे दोबारा नीलामी में शामिल कराने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र क्यों लिखा?
तारा कोल ब्लॉक करीब 5 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला बताया जा रहा है। हसदेव-अरण्य के जंगल और हाथियों के आवागमन को लेकर पहले से विवादों में रहे इस इलाके में कोयला खनन को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी उठती रही हैं।
2023 में नीलामी से बाहर हुआ था ब्लॉक
केंद्रीय कोयला मंत्रालय के मुताबिक, जुलाई 2023 में छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर हसदेव-अरण्य क्षेत्र के संबंधित कोल ब्लॉकों को वाणिज्यिक नीलामी से बाहर किया गया था। इसके बाद तारा ब्लॉक भी नीलामी सूची में नहीं रहा।
विवाद की नई कड़ी दिसंबर 2025 में सामने आई। मंत्रालय के अनुसार 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से केंद्र को पत्र भेजकर तारा कोल ब्लॉक को आगामी नीलामी में शामिल करने का अनुरोध किया गया। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि तारा ब्लॉक लेमरू एलीफेंट कॉरिडोर से बाहर है। इसके बाद ब्लॉक की सीमा में बदलाव कर इसे 15वें वाणिज्यिक कोयला नीलामी दौर में शामिल किया गया।
37.50% राजस्व हिस्सेदारी पर हुआ आवंटन
नीलामी में तारा कोल ब्लॉक के लिए 9 बोलियां प्राप्त हुईं। सबसे ऊंची बोली 37.50 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी की रही और ब्लॉक CG Syn-Gas and Chemicals Limited को मिला।
केंद्र सरकार का अनुमान है कि इस परियोजना से छत्तीसगढ़ को सालाना 1,200 करोड़ रुपए से अधिक राजस्व मिल सकता है और 8 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
बैज का सवाल- जब पहले विरोध था तो अब सिफारिश क्यों?
दीपक बैज ने इसी बदलाव को मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि कांग्रेस सरकार के समय तारा सहित हसदेव-अरण्य के कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने की मांग की गई थी। अब भाजपा सरकार के कार्यकाल में उसी ब्लॉक को नीलामी में शामिल कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
बैज ने सरकार से पूछा है कि आखिर ऐसा क्या बदला कि जिस ब्लॉक को पहले नीलामी से बाहर रखने की मांग की गई थी, उसी के लिए बाद में नीलामी का रास्ता खोलने की सिफारिश करनी पड़ी?
कांग्रेस ने तारा कोल ब्लॉक के जंगल, पर्यावरण और हाथी कॉरिडोर पर संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
भाजपा का पलटवार- कांग्रेस ने भी की थी मांग
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने भी पलटवार किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि तारा ब्लॉक को लेकर कांग्रेस शासनकाल में भी केंद्र सरकार से पत्राचार हुआ था और इसे CMDC को देने की मांग की गई थी। भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक सुविधा के हिसाब से मुद्दा उठाने का आरोप लगाया है।
अभी खनन शुरू नहीं हुआ
इस पूरे विवाद में एक तथ्य सबसे महत्वपूर्ण है। तारा कोल ब्लॉक की नीलामी हो चुकी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तत्काल खनन शुरू हो गया है।
छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के मुताबिक खनन शुरू करने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरण स्वीकृति, वन स्वीकृति और अन्य जरूरी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इन मंजूरियों के बिना वास्तविक खनन या पेड़ों की कटाई शुरू नहीं की जा सकती।
यानी फिलहाल विवाद का केंद्र नीलामी और उसके लिए राज्य सरकार की सिफारिश है, जबकि वास्तविक खनन के लिए आगे कई कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरियां जरूरी हैं।





