पहली बारिश में ही दरकी रेंगाखार जलाशय की सीसी लाइनिंग नहर, 2.24 करोड़ के निर्माण पर उठे सवाल

चार महीने में जगह-जगह आईं दरारें; 274 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा देने के लिए कराया गया था काम, किसानों ने तकनीकी जांच की मांग की
कवर्धा। रेंगाखार जंगल क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से कराई गई नहर की सीसी लाइनिंग निर्माण पूरा होने के महज चार महीने बाद ही सवालों के घेरे में आ गई है। नहर की सीसी लाइनिंग में कई जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं। पहली बारिश के बाद सामने आई इस स्थिति से किसानों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार रेंगाखार जलाशय की नहर के जीर्णोद्धार एवं सीसी लाइनिंग कार्य के लिए करीब 2 करोड़ 24 लाख 10 हजार रुपए की अनुबंध राशि स्वीकृत हुई थी। परियोजना के तहत एक्वाडक्ट निर्माण, सीसी लाइनिंग, कोलाबा पाइप फिक्सिंग और नहर जीर्णोद्धार सहित विभिन्न कार्य किए गए। इसके जरिए करीब 274 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था।
निर्माण के कुछ महीने बाद ही दिखने लगी दरारें
नहर का निर्माण पूरा हुए अभी कुछ ही महीने हुए हैं, लेकिन सीसी लाइनिंग में जगह-जगह दरारें नजर आने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआती बारिश के बाद ही नहर की ऐसी स्थिति हो गई है तो आने वाले वर्षों में इसकी मजबूती और उपयोगिता पर सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है।
किसानों का कहना है कि सिंचाई सुविधा के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि निर्माण टिकाऊ नहीं हुआ तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। नहर के खराब होने से परियोजना का मूल उद्देश्य भी प्रभावित हो सकता है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी दरारों की वजह
नहर में दरारें आने के पीछे निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी कारण या अन्य वजह क्या है, यह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभागीय अधिकारियों के बजाय उच्च स्तरीय तकनीकी टीम से मौके का निरीक्षण कराया जाए और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री तथा निर्धारित मानकों की जांच की जाए।
यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।
युवा कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
प्रदेश युवा कांग्रेस सचिव आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया कि कबीरधाम जिले में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाली सड़कें, पुल-पुलिया और अन्य विकास कार्य यदि कुछ ही समय में खराब होने लगें तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। सरकार को मामले की जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपए की लागत से तैयार नहर की सीसी लाइनिंग पहली ही बारिश में क्यों दरकने लगी? क्या निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ था? और यदि जांच में खामी सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? इन सवालों के जवाब अब विभागीय एवं तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएंगे।



