छत्तीसगढ़ में बारिश का बदला मिजाज: कहीं सड़कें डूबीं, कहीं नदियां उफान पर, बांधों के गेट खुले; जानिए आपके जिले का हाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से सक्रिय मानसून ने कई जिलों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है, जबकि धमतरी और गरियाबंद में जलाशयों से पानी छोड़ा जा रहा है। राजधानी रायपुर समेत मध्य छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भी लगातार बारिश का दौर बना हुआ है।
हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 26 सितंबर को प्रदेश के सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। लोगों से जलमग्न पुल-पुलियों और उफनते नदी-नालों को पार नहीं करने की अपील की गई है।
बस्तर में सबसे ज्यादा असर
बस्तर संभाग इस समय बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में है। जगदलपुर में कई निचले इलाकों और सड़कों पर पानी भरने की खबर है। डिमरापाल के पास नेशनल हाईवे पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। जगदलपुर से बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जाने वाले मार्गों पर भी बारिश का असर पड़ा है। प्रशासन और SDRF की टीमें तैनात हैं। इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे के इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है।
बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा में भी लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा है और कई ग्रामीण तथा अंतरजिला मार्गों पर आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी है। सुकमा में बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए 26 सितंबर को स्कूल बंद रखने का स्थानीय आदेश भी सामने आया है।

कोंडागांव और नारायणपुर में भी भारी बारिश का असर नदी-नालों के जलस्तर पर पड़ा है। इन जिलों में प्रशासन की निगरानी बढ़ी हुई है।
कांकेर में नदी का बढ़ा जलस्तर
कांकेर भी बारिश से प्रभावित जिलों में है। नदी-नालों में पानी बढ़ने के कारण ग्रामीण और निचले इलाकों में आवाजाही को लेकर सावधानी बरती जा रही है। फिलहाल यहां बस्तर-जगदलपुर जैसी व्यापक शहरी जलभराव की स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है।
धमतरी में बांधों ने बढ़ाई चिंता

धमतरी में बारिश का असर सीधे जलाशयों पर दिखाई दे रहा है। 25 सितंबर सुबह तक मुरुमसिल्ली 100%, गंगरेल 98.14%, दुधावा 97.21% और सोंढूर 88.18% भर चुके थे।
गंगरेल के 10 गेट खोलकर करीब 54,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। मुरुमसिल्ली, दुधावा और सोंढूर से भी पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते महानदी और आसपास के निचले इलाकों में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है।
यानी धमतरी में इस समय मुख्य चिंता शहर में बारिश से ज्यादा जलाशयों से बढ़ता जलप्रवाह है।
गरियाबंद में जलाशयों के गेट खुले
गरियाबंद में लगातार बारिश के बीच सिकासार जलाशय करीब 89.32% भर चुका है। बढ़ती आवक को देखते हुए इसके 12 गेट खोले गए और करीब 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। क्षेत्र के दूसरे जलाशयों से भी पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है।
इसका असर नदी किनारे और निचले इलाकों में पड़ सकता है। प्रशासन की निगरानी ऐसे क्षेत्रों में बढ़ाई गई है।
रायपुर और आसपास: बारिश जारी, लेकिन बस्तर जैसी स्थिति नहीं
रायपुर में लगातार बारिश का दौर बना हुआ है। शहर में बारिश के कारण कई जगह जलभराव की स्थिति बन सकती है, लेकिन उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में बस्तर जैसी व्यापक बाढ़ या बड़े पैमाने पर सड़क संपर्क टूटने की पुष्टि नहीं है।
महासमुंद, बलौदाबाजार-भाटापारा और बालोद में भी बारिश का असर है। बालोद में लगातार बारिश को देखते हुए स्कूल बंद रखने का स्थानीय निर्णय सामने आया है।
कबीरधाम सहित कई जिलों में फिलहाल मुख्य स्थिति बारिश की
कबीरधाम, बेमेतरा, दुर्ग, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, कोरबा, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में बारिश का दौर बना हुआ है।
इन जिलों में मौसम विभाग ने बारिश और कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक/बिजली की संभावना जताई है, लेकिन उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में बस्तर, धमतरी या गरियाबंद जैसी बड़ी बाढ़, बड़े पैमाने पर सड़क बंद होने या जलाशय से भारी मात्रा में पानी छोड़ने जैसी प्रमुख घटना की स्पष्ट पुष्टि नहीं मिली है।
कबीरधाम जिले में लगातार दो दिनों से तेज बारिश जारी है और मौसम सक्रिय है, लेकिन उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में फिलहाल किसी बड़े बाढ़ संकट या प्रमुख सड़क मार्ग के बंद होने की पुष्टि नहीं है। लेकिन सकरी नदी का जल स्तर बढ़ने की ताजा सूचना मिली है। लगातार हो रहे अत्यधिक बारिश के चलते जिला शिक्षाधिकारी ने जिले के सभी स्कूलों में 26 सितम्बर को अवकाश घोषित किये हैं।





