तीन साल से बिजली बिल नहीं भरा, आखिर कट गई तहसील की बत्ती; ₹75 हजार बकाया ने सरकारी दफ्तर को कर दिया ‘अंधेरे’ में

बेमेतरा। आम आदमी का बिजली बिल कुछ महीने अटक जाए तो बिजली विभाग की नजर पड़ जाती है। लेकिन जब मामला सरकारी दफ्तर का हो और बिल करीब तीन साल तक जमा न हो, तो कहानी थोड़ी अतरंगी जरूर लगती है। बेमेतरा जिले के देवकर तहसील कार्यालय में फिलहाल कुछ ऐसा ही हुआ है।
करीब ₹75 हजार 460 रुपये का बिजली बिल बकाया रहने के बाद बिजली विभाग ने तहसील कार्यालय का कनेक्शन काट दिया। यानी जिस दफ्तर से लोगों के राजस्व और प्रशासन से जुड़े काम निपटने हैं, वहीं अब बिजली गुल होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसकी जानकारी बिजली विभाग के एई गंगा प्रसाद बंजारे ने दी है।
बिल आज का नहीं, जून 2023 से अटका है
मामला सिर्फ एक-दो महीने के बकाए का नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक देवकर तहसील कार्यालय का बिजली बिल 12 जून 2023 से लंबित बताया गया है। लगातार भुगतान नहीं होने के बाद बकाया बढ़ते-बढ़ते करीब ₹75,460 तक पहुंच गया और आखिरकार बिजली विभाग ने कनेक्शन काट दिया।
अब स्थिति यह है कि तहसील कार्यालय में होने वाले रोजमर्रा के काम बिजली आपूर्ति बंद होने से प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी काम के लिए दूर-दराज से पहुंचने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
असली ‘पेच’ यहां है…
इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात यह है कि देवकर तहसील कार्यालय खुद के भवन में नहीं, बल्कि नगर पंचायत के अधीन आने वाले टाउन हॉल भवन में संचालित होता है।
और जानकारी के मुताबिक, कार्यालय का बिजली मीटर भी नगर पंचायत देवकर के CMO के नाम पर दर्ज है। ऐसे में बिजली बिल का भुगतान आखिर किस विभाग की जिम्मेदारी है—इसी को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं बताई गई है।
यानी दफ्तर तहसील का, भवन नगर पंचायत का और मीटर CMO के नाम का… लेकिन बिल कौन भरेगा, इसी सवाल के बीच बिजली विभाग ने अपना काम कर दिया—बिल नहीं आया तो बत्ती भी नहीं रही।
असर सीधे जनता पर
तहसील कार्यालय में आम लोगों के कई जरूरी सरकारी काम होते हैं। बिजली बंद होने से इन कामों पर असर पड़ रहा है। दूर-दराज से पहुंचे लोगों के लिए परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें सरकारी काम के लिए कार्यालय तक आना पड़ता है।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं है कि बकाया राशि कब तक जमा होगी और कनेक्शन दोबारा कब जोड़ा जाएगा।
बड़ी तस्वीर भी समझिए
देवकर का मामला अकेला उदाहरण नहीं है। जुलाई 2026 में भी छत्तीसगढ़ में बिजली बिल बकाया रहने पर बड़ी संख्या में सरकारी कार्यालयों के कनेक्शन काटे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे सरकारी विभागों के बिजली बकाया और भुगतान व्यवस्था को लेकर व्यापक सवाल उठे थे।
लेकिन देवकर की कहानी में खास बात यह है कि यहां ₹75,460 का बिल जून 2023 से लंबित बताया जा रहा है, और अब इसी बकाए ने तहसील कार्यालय की बिजली ही गुल कर दी है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—तीन साल तक बिल क्यों नहीं जमा हुआ और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी? इसका आधिकारिक जवाब सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।





