उतई सरकारी अस्पताल में अव्यवस्था के आरोप, दवाओं से लेकर ड्यूटी और पुराने गबन की जांच पर उठे सवाल

दुर्ग। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) उतई की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायत में अस्पताल में डॉक्टरों की ड्यूटी, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, दवाओं की उपलब्धता, एक्स-रे सेवा, कर्मचारियों के मानदेय और जीवनदीप समिति की राशि से जुड़े पुराने वित्तीय मामले सहित कई मुद्दे उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मामले की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
डॉक्टर की ड्यूटी और निजी प्रैक्टिस पर सवाल
शिकायत में अस्पताल के प्रभारी डॉ. दुर्गेश वर्मा की ड्यूटी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि निर्धारित समय के अनुसार ड्यूटी नहीं की जा रही है और कुछ दिनों में उनकी अनुपस्थिति रहती है। शिकायतकर्ता का दावा है कि डॉक्टर सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही अस्पताल में रहते हैं।
शिकायत में यह भी आरोप है कि प्रभारी डॉक्टर की निजी क्लीनिक संचालित होने के कारण सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को निजी अस्पताल आने की सलाह दी जाती है। इन आरोपों की विभागीय स्तर पर जांच की मांग की गई है।
रात की ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
18 जुलाई की रात अस्पताल में डॉक्टर की ड्यूटी नहीं होने के कारण इलाज को लेकर कुछ लोगों के हंगामे की स्थिति बनने का दावा शिकायत में किया गया है। इससे अस्पताल के कर्मचारियों में डर की स्थिति बनने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने रात में डॉक्टर की नियमित ड्यूटी और चौकीदार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

26 लाख के वित्तीय मामले में BPM की भूमिका की जांच की मांग
अस्पताल की जीवनदीप समिति और जननी सुरक्षा योजना से जुड़े करीब 26 लाख रुपए के कथित वित्तीय गड़बड़ी के मामले को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, इस मामले में तत्कालीन प्रभारी को निलंबित और एक संविदा महिला कर्मचारी की सेवा समाप्त की जा चुकी है, लेकिन ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर यानी BPM की भूमिका की जांच और कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य योजनाओं और वित्तीय गतिविधियों की मॉनिटरिंग के बावजूद गड़बड़ी समय पर सामने नहीं आई। इसी आधार पर संबंधित अवधि में पदस्थ BPM की भूमिका की स्वतंत्र जांच, जांच पूरी होने तक निलंबन और आवश्यकता होने पर FIR के दायरे में लाने की मांग की गई है।
पुराने रिकॉर्ड जलाने का भी आरोप
शिकायत में CHC उतई की स्थापना शाखा के वर्ष 2021-22 के रिकॉर्ड को आग में नष्ट किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार इन रिकॉर्ड में बिल-वाउचर और खर्च से संबंधित दस्तावेज शामिल थे। मामले की जांच कर रिकॉर्ड नष्ट करने के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
एक्स-रे सेवा और मशीन को लेकर मरीज परेशान
शिकायत के अनुसार एक्स-रे तकनीशियन के समय पर उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। मशीन खराब होने की स्थिति में कई दिनों तक सेवा प्रभावित होने का आरोप भी लगाया गया है। एक्स-रे कक्ष में पानी के सीपेज की समस्या का भी उल्लेख शिकायत में है।
अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस के लंबे समय से अनुपयोगी होने का दावा करते हुए उन्हें नियमानुसार डिस्मेंटल कराने की मांग भी की गई है।
जन औषधि केंद्र को लेकर विवाद
अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र को खाली कराने के आदेश को लेकर भी विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि वर्ष 2016 में अनिश्चित अवधि के लिए टेंडर प्रक्रिया हुई थी और संबंधित संचालक ने राशि जमा की थी। स्वास्थ्य खराब होने के कारण कुछ समय संचालन नहीं कर पाने के बाद दोबारा संचालन की अनुमति मांगने की बात भी शिकायत में कही गई है।
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि डॉक्टरों को कमीशन दिए जाने की मांग की गई, जिसके कारण जन औषधि केंद्र संचालक को परेशानी हो रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी आयरन और कैल्शियम की दवाएं तथा शुगर जांच की स्ट्रिप उपलब्ध नहीं हैं। इससे मरीजों को परेशानी होने की बात कही गई है। इन दावों की वर्तमान स्थिति की विभागीय जांच आवश्यक है।
कर्मचारियों के कम मानदेय का आरोप
अस्पताल में जीवनदीप समिति के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को कम मानदेय दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायत के अनुसार कुछ कर्मचारियों से सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक काम कराया गया और उन्हें केवल 3 हजार रुपए का भुगतान किया गया। OPD पर्ची काटने के साथ रजिस्टर संधारण जैसे काम भी कराने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक भुगतान संबंधी परेशानी के कारण तीन स्टाफ नर्स नौकरी छोड़ चुके हैं।
जांच प्रक्रिया पर भी शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल
शिकायतकर्ता का आरोप है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर और CMHO कार्यालय में कई बार आवेदन दिए गए। जांच के लिए उन्हीं स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बावजूद बिना संतोषजनक कार्रवाई के शिकायत बंद किए जाने का दावा भी किया गया है।
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि उतई अस्पताल से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कब होगी और जांच में जिन आरोपों की पुष्टि होगी, उन पर जिम्मेदारी तय कर क्या कार्रवाई की जाएगी।





