19 साल से बिलासपुर में रह रहा था बांग्लादेशी नागरिक, STF ने पकड़ा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में STF और जिला विशेष शाखा की टीम ने एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान अतीक हुसैन (42) के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश के नारायणगंज जिले का रहने वाला बताया गया है। वह लंबे समय से बिलासपुर में रह रहा था और NTPC सीपत में निजी कंपनी के जरिए लिफ्ट मेंटेनेंस का काम कर रहा था।
पुलिस के अनुसार अतीक वर्ष 2005 में बांग्लादेश से भारत आया था। शुरुआती दो साल तमिलनाडु में रहने के बाद वह बिलासपुर पहुंचा। इसके बाद उसने सीपत स्थित NTPC में बीईसीओ लिफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से लिफ्ट मेंटेनेंस का काम किया। करीब 19 वर्षों से वह बिलासपुर में रह रहा था।
सूर्या विहार कॉलोनी से गिरफ्तारी
STF को सूचना मिली थी कि अतीक सरकंडा क्षेत्र की सूर्या विहार कॉलोनी में छिपकर रह रहा है। इसके बाद टीम ने निगरानी की और 24 सितंबर की सुबह करीब 5 बजे उसके ठिकाने पर दबिश देकर उसे पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक उसके किराये के मकान से पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और नौवीं कक्षा की अंकसूची समेत कई दस्तावेज मिले हैं। पुलिस का कहना है कि इन दस्तावेजों को गलत तरीके से तैयार कराने की बात पूछताछ में सामने आई है। हालांकि दस्तावेजों की वैधता और पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है।

20 दिन पहले पुलिस को चकमा देकर निकला था
रिपोर्ट के अनुसार करीब 20 दिन पहले सिरगिट्टी क्षेत्र में संदिग्ध लोगों की जांच के दौरान अतीक भी पुलिस की निगरानी में आया था। पूछताछ और सत्यापन के दौरान वह वहां से निकल गया था। इसके बाद STF ने उसकी तलाश शुरू की और सरकंडा क्षेत्र में उसके छिपे होने की सूचना मिलने पर निगरानी के बाद कार्रवाई की।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू
गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ बांग्लादेश डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की गई है। उसे रायपुर स्थित होल्डिंग सेंटर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब उसके भारत में प्रवेश, दस्तावेज तैयार कराने और यहां रहने के दौरान संपर्कों की भी जांच कर रही है।
बिलासपुर पुलिस के अनुसार अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी व्यक्ति की पहचान या दस्तावेजों को लेकर संदेह होने पर स्वयं कार्रवाई न करें, बल्कि पुलिस को सूचना दें।





