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UPI पर बड़ा बदलाव: ₹2,000 तक कोई चार्ज नहीं, उससे ऊपर क्या बदलेगा? सरकार की पूरी नीति समझिए

नई दिल्ली। UPI इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल पेमेंट से जुड़ी नई व्यवस्था स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क लगाने पर रोक लगा दी है। RuPay से किए जाने वाले डेबिट कार्ड भुगतान को भी इस शुल्क-मुक्त व्यवस्था में रखा गया है।

सरकार की इस अधिसूचना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब ₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर चार्ज देना पड़ेगा?

इसका सीधा जवाब है—अभी नहीं।

सरकार ने ₹2,000 से ज्यादा के हर UPI भुगतान पर कोई निश्चित शुल्क लागू नहीं किया है। हालांकि, नई कानूनी व्यवस्था ने बड़े मूल्य के कुछ UPI भुगतान पर भविष्य में Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने का रास्ता जरूर खोल दिया है।

सरकार ने क्या आदेश जारी किया?

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 14 सितंबर 2026 को S.O. 5067(E) के तहत अधिसूचना जारी की। इसमें Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत दो इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को निर्दिष्ट किया गया है—

  • RuPay-powered Debit Card
  • ₹2,000 तक के UPI लेनदेन

अधिसूचना में कहा गया है कि इन माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकता।

इसका मतलब है कि ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 का UPI भुगतान करने पर बैंक, पेमेंट सिस्टम या संबंधित सिस्टम प्रोवाइडर की ओर से कोई अलग UPI शुल्क नहीं लिया जा सकता।

फिर ₹2,000 से ज्यादा का क्या होगा?

यहीं से असली बदलाव शुरू होता है।

पहले UPI पर शुल्क लगाने को लेकर कानूनी व्यवस्था अधिक व्यापक रूप से शुल्क को रोकती थी। 2026 में Payment and Settlement Systems Act में संशोधन के बाद सरकार ने यह रास्ता खोला कि भविष्य में कुछ डिजिटल भुगतान पर शुल्क/MDR की व्यवस्था बनाई जा सके।

अब 14 सितंबर की अधिसूचना ने ₹2,000 तक के UPI भुगतान को स्पष्ट रूप से शुल्क-मुक्त दायरे में सुरक्षित कर दिया है।

इसका दूसरा पहलू यह है कि ₹2,000 से अधिक के भुगतान इस विशेष छूट की सीमा से बाहर हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि ₹2,001 का भुगतान करते ही आपके खाते से कोई निश्चित शुल्क कट जाएगा।

फिलहाल ऐसा कोई सार्वभौमिक चार्ज लागू नहीं हुआ है।

MDR क्या है और किससे लिया जाता है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए भुगतान व्यवस्था में व्यापारी की तरफ से संबंधित बैंक और पेमेंट सिस्टम को दिया जाता है।

इसलिए MDR को सीधे “ग्राहक से UPI फीस” समझना सही नहीं है।

उदाहरण के लिए, अगर भविष्य में किसी बड़े merchant UPI transaction पर MDR लागू किया जाता है, तो इसका मतलब जरूरी नहीं कि ग्राहक के खाते से अलग से “UPI चार्ज” काट लिया जाए। शुल्क की संरचना merchant और payment ecosystem के बीच लागू हो सकती है।

यही कारण है कि “₹2,000 से ऊपर UPI करने पर ग्राहक से चार्ज कटेगा” कहना अभी जल्दबाजी होगी।

क्या दोस्त या परिवार को ₹5,000 भेजने पर चार्ज लगेगा?

सरकार की मौजूदा नीति में Person-to-Person यानी P2P भुगतान को आम यूजर के लिए चार्जेबल बनाने की घोषणा नहीं की गई है।

सरकार ने अगस्त 2026 में स्पष्ट किया था कि UPI यूजर्स के लिए मुफ्त रहेगा और यदि MDR की व्यवस्था लाई जाती है तो वह threshold-based होगी, यानी सभी UPI transactions पर blanket charge नहीं लगाया जाएगा।

इसलिए सामान्य व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को ₹5,000, ₹10,000 या उससे अधिक भेजने को लेकर यह कहना कि “अब UPI शुल्क लगेगा”, फिलहाल सही नहीं होगा।

असली फोकस Merchant Payment पर

मौजूदा नीति की चर्चा मुख्य रूप से P2M यानी Person-to-Merchant लेनदेन को लेकर है।

यानी जब कोई व्यक्ति दुकान, कंपनी, कारोबारी या अन्य merchant को UPI से भुगतान करता है।

सरकार की अगस्त की जानकारी के मुताबिक, यदि MDR लागू किया जाता है तो वह सभी UPI transactions पर एक समान नहीं लगाया जाएगा, बल्कि threshold के आधार पर सीमित किया जा सकता है।

इसका उद्देश्य UPI के छोटे और रोजमर्रा के भुगतानों को महंगा होने से बचाना है।

₹2,000 की सीमा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

सरकार पहले भी छोटे व्यापारियों के लिए ₹2,000 तक के UPI भुगतान को प्रोत्साहित करती रही है।

मार्च 2025 में केंद्र सरकार ने FY 2024-25 के लिए ₹1,500 करोड़ की incentive scheme मंजूर की थी। इसमें छोटे merchants को किए गए ₹2,000 तक के UPI P2M transactions को प्रोत्साहित किया गया और ऐसे लेनदेन पर 0.15 प्रतिशत incentive का प्रावधान था।

यानी सरकार की डिजिटल पेमेंट नीति में छोटे मूल्य के UPI भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा पहले से रही है।

अब नई अधिसूचना ने ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर शुल्क न लेने की बात को कानूनी रूप से स्पष्ट कर दिया है।

क्या ₹2,001 के भुगतान पर अब चार्ज लगेगा?

नहीं, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता।

मान लीजिए आपने किसी दुकान पर ₹2,001 का भुगतान UPI से किया। सिर्फ इस वजह से कि राशि ₹2,000 से ₹1 ज्यादा है, सरकार ने कोई तय “₹X” या “X प्रतिशत” शुल्क आज से लागू नहीं किया है।

भविष्य में यदि MDR लागू किया जाता है तो उसकी दर, सीमा, किस प्रकार के merchant पर लागू होगी और शुल्क कौन वहन करेगा—इनकी अलग व्यवस्था तय करनी होगी।

यही बात इस खबर को समझने में सबसे महत्वपूर्ण है।

फिर 0.25%, 0.4% या 0.5% की चर्चा क्यों?

हाल के महीनों में मीडिया रिपोर्टों में बड़े UPI merchant transactions पर संभावित MDR की अलग-अलग दरों की चर्चा हुई है। कुछ रिपोर्टों में करीब 0.25% से 0.4% तक की संभावित दर का उल्लेख किया गया है। लेकिन ये चर्चा या संभावित ढांचा है, कोई सार्वभौमिक लागू सरकारी दर नहीं।

इसलिए अभी यह लिखना गलत होगा कि:

“₹2,000 से ऊपर UPI पर 0.4% चार्ज लागू हो गया।”

सही तथ्य यह है:

“₹2,000 तक के UPI पर शुल्क रोक दिया गया है और ₹2,000 से ऊपर के कुछ merchant transactions पर भविष्य में MDR लगाने का रास्ता खुला है।”

सरकार को UPI पर MDR की जरूरत क्यों पड़ रही है?

UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। इससे बैंकों, पेमेंट ऐप्स और पूरे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर infrastructure और processing cost आती है।

वर्तमान zero-MDR व्यवस्था में merchant से UPI payment स्वीकार करने के लिए MDR नहीं लिया जाता। सरकार इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए incentive/subsidy के जरिए payment ecosystem को समर्थन देती रही है।

अब सरकार एक ऐसा मॉडल तैयार करने पर विचार कर रही है जिसमें छोटे और रोजमर्रा के UPI भुगतान मुफ्त रहें, लेकिन बड़े merchant transactions से payment ecosystem की लागत का कुछ हिस्सा निकाला जा सके।

अगस्त 2026 में सरकार ने भी कहा था कि यदि MDR लाया जाता है तो वह व्यापक या blanket charge नहीं होगा।

आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?

अभी के लिए रोजमर्रा के UPI इस्तेमाल करने वालों को घबराने की जरूरत नहीं है।

₹2,000 तक के UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकता।

चाय, किराना, सब्जी, पेट्रोल, छोटे दुकानदारों और रोजमर्रा के छोटे भुगतान इस सीमा में आते हैं तो इन पर इस अधिसूचना के तहत शुल्क नहीं लगाया जा सकता।

दूसरी ओर, बड़े मूल्य के merchant payments के लिए आगे नई व्यवस्था आने की संभावना है।

आसान भाषा में समझिए

भुगतानक्या होगा?
₹500 UPIकोई चार्ज नहीं
₹1,500 UPIकोई चार्ज नहीं
₹2,000 UPIकोई चार्ज नहीं
₹2,001 UPIअभी कोई तय चार्ज नहीं
₹10,000 दुकान/मर्चेंट को UPIअभी कोई सार्वभौमिक चार्ज लागू नहीं
दोस्त को ₹5,000 UPIनया सार्वभौमिक चार्ज घोषित नहीं
RuPay Debit Cardअधिसूचना के तहत शुल्क-मुक्त

👉 सबसे जरूरी बात:
₹2,000 से ऊपर UPI करने पर अभी तुरंत कोई तय चार्ज नहीं कट रहा है। सरकार ने बड़े Merchant UPI Payments पर भविष्य में MDR लगाने का रास्ता जरूर खोला है।

क्या यह UPI को महंगा बनाने की शुरुआत है?

इसे सीधे-सीधे ऐसा कहना सही नहीं होगा, लेकिन नीति में महत्वपूर्ण बदलाव जरूर है।

सरकार ने एक तरफ ₹2,000 तक के UPI भुगतान को शुल्क से सुरक्षित किया है, वहीं दूसरी तरफ बड़े मूल्य के transactions पर भविष्य में MDR की संभावना के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया है।

यानी छोटे भुगतान के लिए सुरक्षा, बड़े merchant payments के लिए संभावित शुल्क की गुंजाइश—यह नई नीति का मूल ढांचा दिखाई देता है।

पहले भी ₹2,000 को लेकर भ्रम हुआ था

अप्रैल 2025 में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI transactions पर GST लगाया जा सकता है। वित्त मंत्रालय ने तब इसे पूरी तरह गलत बताया था और कहा था कि UPI transactions पर ₹2,000 से ऊपर GST लगाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं था। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि GST किसी लागू MDR जैसे शुल्क पर लग सकता है, स्वयं UPI transaction amount पर नहीं।

इसलिए UPI पर GST और MDR को एक ही चीज समझना गलत है।

अब आगे क्या होगा?

सरकार ने अगस्त में कहा था कि कानून में संशोधन के बाद UPI and Services Steering Committee, जिसकी अध्यक्षता NPCI करता है, MDR से संबंधित व्यवस्था पर निर्णय ले सकती है। सरकार ने यह भी कहा था कि यदि MDR लाया गया तो यह threshold-based होगा और सभी UPI transactions पर लागू नहीं होगा।

इसलिए आगे देखने वाली सबसे महत्वपूर्ण चीज होगी—

₹2,000 से ऊपर के merchant UPI transactions के लिए सरकार/NPCI किस तरह की MDR दर और नियम तय करता है।

जब तक वह अलग व्यवस्था लागू नहीं होती, केवल ₹2,000 से अधिक भुगतान होने के कारण ग्राहक से कोई निश्चित UPI शुल्क काटे जाने की बात नहीं कही जा सकती।

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रुपेश चन्द्रवंशी

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लेखक/संपादक BJMC (Bachelor of Journalism & Mass Communication) डिग्रीधारी एवं 12 वर्षों से अधिक के मीडिया अनुभव के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ... Read More

लेखक/संपादक BJMC (Bachelor of Journalism & Mass Communication) डिग्रीधारी एवं 12 वर्षों से अधिक के मीडिया अनुभव के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेब मीडिया में पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है।

कार्यक्षेत्र में समाचार लेखन, संपादन, समसामयिक घटनाक्रम, स्थानीय मुद्दे और जनसरोकार से जुड़े विषय प्रमुख रहे हैं। तथ्यपरक समाचार प्रस्तुति, जमीनी मुद्दों की पड़ताल, जनहित के विषयों, भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों और खोजी खबरों को प्रमुखता देना पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता रही है।

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