बोड़ला की बेटी गीता यादव ने चीन में रचा इतिहास, भारत को बनाया एशिया कप चैंपियन

कवर्धा। कबीरधाम जिले के छोटे से कस्बे बोड़ला की बेटी गीता यादव ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और संघर्ष के दम पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी में जिले का नाम रोशन किया है। गीता भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं, जिसने चीन की धरती पर मेजबान टीम को 1-0 से हराकर महिला जूनियर एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम किया। भारत की इस ऐतिहासिक जीत के साथ गीता के वर्षों के संघर्ष और मेहनत को भी बड़ी पहचान मिली है।
गीता का हॉकी सफर आसान नहीं रहा। बोड़ला में हॉकी की शुरुआती ट्रेनिंग उन्होंने कोच शिवा चौहान से ली। खेल के प्रति उनकी लगन और लगातार बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें बिलासपुर स्थित खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण का अवसर मिला। यहां उन्होंने अपने खेल को और निखारा और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम के दरवाजे तक पहुंच बनाई।
गीता की मेहनत का परिणाम वर्ष 2024 में सामने आया, जब उन्होंने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने नीदरलैंड और बेल्जियम दौरे में भारत के लिए खेला। इसके बाद अर्जेंटीना दौरे और फिर इंग्लैंड-स्कॉटलैंड दौरे में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा रहीं।
लगातार अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बेहतरीन प्रदर्शन के बाद गीता का चयन भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में हुआ। चीन में आयोजित जूनियर एशिया कप में उन्होंने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। जापान के खिलाफ मुकाबले में गीता ने दो गोल दागे और भारत की 7-0 की बड़ी जीत में अहम भूमिका निभाई। टूर्नामेंट के एक मुकाबले में उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का सम्मान भी मिला।
फाइनल मुकाबले में भारत का सामना मेजबान चीन से हुआ। मुकाबला बेहद कड़ा रहा, लेकिन भारतीय टीम ने शानदार रक्षात्मक खेल दिखाते हुए चीन को 1-0 से शिकस्त दी और खिताब अपने नाम कर लिया। भारत की यह जूनियर एशिया कप में लगातार तीसरी खिताबी जीत है।
बोड़ला की बेटी गीता यादव की यह उपलब्धि सिर्फ उनके परिवार और बोड़ला के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे कबीरधाम जिले के लिए गर्व का विषय है। छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची गीता आज क्षेत्र के उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
बोड़ला की हॉकी मैदान से शुरू हुई गीता की यात्रा अब चीन की धरती पर भारत के तिरंगे तक पहुंच चुकी है।





