24 दिन से हड़ताल पर पटवारी, सरकार अब एस्मा लगाने की तैयारी में; धान खरीदी से पहले बढ़ा टकराव

संघ अध्यक्ष निलंबित, 150 से अधिक पटवारियों को नोटिस; PV ऐप, वेतन विसंगति और पदोन्नति की मांग पर अड़े कर्मचारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने अब गंभीर प्रशासनिक संकट का रूप ले लिया है। 13 अक्टूबर से जारी आंदोलन 6 नवंबर को 24वें दिन भी जारी रहा। इधर, 15 नवंबर से प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होनी है, लेकिन पटवारियों की अनुपस्थिति के कारण फसल सत्यापन, गिरदावरी और किसान पंजीयन से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने भी अब सख्त रुख अपना लिया है। पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष भागवत कश्यप को निलंबित किया जा चुका है और 150 से अधिक पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। राजस्व विभाग एस्मा (ESMA) लगाने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।
15 नवंबर से धान खरीदी, तैयारियों पर संकट
प्रदेश में धान खरीदी शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। खरीदी से पहले किसानों के रिकॉर्ड, फसल का रकबा, गिरदावरी और सत्यापन जैसे काम महत्वपूर्ण होते हैं। पटवारियों की हड़ताल के कारण इन कार्यों की गति प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि खरीदी केंद्रों पर धान बेचने पहुंचने वाले किसानों के रिकॉर्ड और फसल संबंधी जानकारी समय पर सत्यापित हो सके। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो इसका असर किसानों को होने वाली प्रक्रिया और राजस्व संबंधी सेवाओं पर पड़ सकता है।

सरकार की सख्ती: अध्यक्ष निलंबित, नोटिस जारी
हड़ताल समाप्त कराने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष भागवत कश्यप को निलंबित किया गया है। इसके अलावा 150 से अधिक पटवारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
नईदुनिया की 6 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व विभाग एस्मा लागू करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, अभी तक एस्मा लागू करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार की ओर से पटवारियों को काम पर लौटने की अपील भी की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हड़ताल कर रहे पटवारियों से काम पर लौटने की अपील की है। उनका कहना है कि कर्मचारी अपनी मांगों को दूसरे तरीके से भी रख सकते हैं। किसानों और आम जनता के काम प्रभावित नहीं होने चाहिए।
सरकार का जोर इस बात पर है कि धान खरीदी और जरूरी राजस्व कार्य निर्धारित समय पर पूरे हों।
पटवारी क्यों कर रहे हैं आंदोलन?
पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- PV ऐप की समस्या: फसल के भौतिक सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे PV ऐप में तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों का समाधान।
- वेतन विसंगति: लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करना।
- पदोन्नति: पटवारियों को राजस्व निरीक्षक (RI) पद पर पदोन्नति के पर्याप्त अवसर देना।
- निलंबन और कार्रवाई: आंदोलन के दौरान की गई दंडात्मक कार्रवाई और निलंबन वापस लेना।
संघ का कहना है कि तकनीकी समस्याओं का समाधान किए बिना PV ऐप के माध्यम से काम करना व्यवहारिक रूप से मुश्किल है। उनका आरोप है कि मांगों पर बातचीत करने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
पटवारियों की अनुपस्थिति से आम जनता परेशान
पटवारियों की हड़ताल का असर केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं है। जमीन से जुड़े कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं।
इनमें शामिल हैं:
- जमीन का नामांतरण और बंटवारा
- सीमांकन और राजस्व प्रकरण
- आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र के लिए जांच प्रतिवेदन
- डिजिटल क्रॉप सर्वे और फसल सत्यापन
- किसान पंजीयन और धान खरीदी से जुड़े अभिलेख
- चक्रवाती बारिश से प्रभावित फसलों का सर्वे और राहत संबंधी कार्रवाई
इन सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे आम नागरिकों और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आंदोलनकारियों का भी सरकार पर पलटवार
पटवारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि नोटिस और निलंबन के जरिए आंदोलन खत्म कराने का दबाव बनाया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध किया है। रायपुर के तूता धरनास्थल से हटाए जाने के बाद पटवारी मठपुरैना स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
6 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलनकारियों ने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ कर सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना भी की।
क्या एस्मा से खत्म होगी हड़ताल?
सरकार के सामने अब दो रास्ते दिखाई दे रहे हैं—एक तरफ बातचीत के जरिए पटवारियों की मांगों का समाधान निकालना और दूसरी तरफ आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) जैसे सख्त कानूनी प्रावधानों पर विचार करना।
हालांकि, एस्मा लागू करने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। यदि सरकार यह कदम उठाती है तो आंदोलनरत कर्मचारियों पर कानूनी और विभागीय कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। लेकिन इससे कर्मचारियों की मूल मांगों का समाधान अपने आप नहीं होगा।
बड़ा सवाल: धान खरीदी से पहले समाधान क्यों नहीं?
13 अक्टूबर से शुरू हुआ आंदोलन अब 24 दिन पार कर चुका है। धान खरीदी की तारीख नजदीक है, किसान अपनी फसल बेचने की तैयारी में हैं और राजस्व विभाग के कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं।
ऐसे में सवाल सरकार और पटवारी संघ दोनों से है—क्या धान खरीदी शुरू होने से पहले कोई समाधान निकलेगा? क्या PV ऐप की समस्याओं और वेतन-पदोन्नति से जुड़ी मांगों पर ठोस बातचीत होगी? या फिर किसान और आम नागरिक इस प्रशासनिक टकराव का खामियाजा भुगतेंगे?





