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CM हेल्पलाइन 1076 में 1.07 लाख शिकायतें पेंडिंग! अफसरों की नाकामी पर बड़ा सवाल, सिर्फ 39% शिकायतों का समाधान

सरकारी डैशबोर्ड के ताजा आंकड़ों ने खोली व्यवस्था की पोल; 1.76 लाख शिकायतें दर्ज, 68 हजार का निराकरण, लेकिन 1 लाख से ज्यादा मामले अब भी लंबित

रायपुर। आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत दिलाने और उनकी शिकायतों का समयबद्ध समाधान करने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के सामने अब लंबित शिकायतों का बड़ा आंकड़ा सामने आया है। छत्तीसगढ़ शासन के आधिकारिक CM हेल्पलाइन पोर्टल के ताजा डैशबोर्ड के मुताबिक प्रदेश में अब तक 1,76,079 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें से 68,316 शिकायतों का निराकरण दर्ज है, जबकि 1,07,763 शिकायतें अभी लंबित हैं। पोर्टल पर समाधान दर 39 प्रतिशत दिखाई गई है।

यानी आंकड़ों के हिसाब से हर 100 शिकायतों में करीब 61 शिकायतें अभी समाधान की प्रक्रिया में हैं या लंबित हैं। यह स्थिति उस व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, जिसे सरकार ने नागरिकों की शिकायतों के त्वरित, पारदर्शी और जवाबदेह निराकरण के लिए शुरू किया है।

सरकार ने कहा था—समय-सीमा में होगा समाधान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 9 जून 2026 को CM हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ किया था। सरकार की ओर से बताया गया था कि हेल्पलाइन 24 घंटे, सातों दिन संचालित होगी और नागरिक अपनी शिकायतें फोन, वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सऐप के माध्यम से दर्ज करा सकेंगे।

इस व्यवस्था में शिकायतों को संबंधित विभाग और अधिकारी तक पहुंचाने के साथ उनकी निगरानी का सिस्टम भी बनाया गया है। सरकार के अनुसार करीब 8 हजार अधिकारी इस प्रणाली से जुड़े हैं और शिकायतों के लिए निर्धारित समय-सीमा तय की गई है।

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यही वजह है कि अब लंबित शिकायतों का यह आंकड़ा महत्वपूर्ण हो जाता है।

1.76 लाख शिकायतें आईं, 68 हजार का ही निराकरण

आधिकारिक पोर्टल के ताजा आंकड़ों के अनुसार—

CM हेल्पलाइन 1076 : शिकायतों की स्थिति

कुल पंजीकृत शिकायतें 1,76,079
निराकृत शिकायतें 68,316
लंबित शिकायतें 1,07,763
समाधान दर
39%
स्रोत: CM Helpline 1076 पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़े

इन आंकड़ों से साफ है कि दर्ज शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं निराकरण की तुलना में लंबित मामलों की संख्या काफी ज्यादा है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—जब हजारों अधिकारी सिस्टम से जुड़े हैं तो 1.07 लाख से ज्यादा शिकायतें लंबित क्यों हैं?

अफसरों की जवाबदेही के लिए बनाया गया था सिस्टम

CM हेल्पलाइन की शुरुआत करते समय सरकार ने इसे केवल शिकायत दर्ज करने का नंबर नहीं, बल्कि जवाबदेही आधारित शिकायत प्रबंधन प्रणाली बताया था।

शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित अधिकारी तक पहुंचाने और उसके समाधान की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक करने की व्यवस्था है। शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत की स्थिति और संबंधित विभाग की जानकारी मिल सकती है।

सरकार की योजना में यह भी बताया गया था कि शिकायत निर्धारित समय में हल नहीं होने पर उसे अगले स्तर के अधिकारी तक भेजा जाएगा।

लेकिन अब सामने आया लंबित मामलों का आंकड़ा इस पूरी व्यवस्था की जमीनी कार्यक्षमता पर सवाल खड़ा करता है।

बालोद में कलेक्टर को खुद देना पड़ा निर्देश

लंबित शिकायतों को लेकर जिला स्तर पर भी अधिकारियों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं।

1 सितंबर को बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने अधिकारियों को CM हेल्पलाइन 1076 के लंबित आवेदनों का प्राथमिकता के साथ निर्धारित समयावधि में निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से L-1 स्तर पर ही शिकायतों का संतुष्टिपूर्ण निराकरण और उचित फीडबैक दर्ज करने को कहा।

यह उदाहरण बताता है कि हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज होना ही काफी नहीं है। असली चुनौती शिकायत को सही मायने में हल कराने की है।

सिर्फ ‘निराकरण’ नहीं, संतुष्टि भी जरूरी

CM हेल्पलाइन की व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रावधान शिकायतकर्ता का फीडबैक है।

सरकारी प्रणाली के अनुसार शिकायत के समाधान के बाद संबंधित नागरिक से फीडबैक लिया जाना है। शिकायतकर्ता संतुष्ट होने पर ही शिकायत को पूर्ण रूप से निराकृत माना जाना है। असंतुष्टि की स्थिति में शिकायत को दोबारा सक्रिय कर आगे भेजे जाने की व्यवस्था बताई गई है।

इसलिए केवल कागज पर शिकायत बंद कर देना इस सिस्टम की मूल भावना के खिलाफ होगा।

कुछ जिलों में तेजी, फिर भी प्रदेश का आंकड़ा चिंताजनक

सरकार की ओर से कई जिलों में CM हेल्पलाइन के जरिए समस्याओं के तत्काल समाधान की जानकारी भी दी गई है।

महासमुंद में 25 जून तक 1,143 शिकायतें प्राप्त होने और 352 शिकायतों के निराकरण की जानकारी दी गई थी। वहीं मुंगेली में हेल्पलाइन शिकायत के बाद लंबित प्रधानमंत्री आवास की किस्त जारी होने जैसे मामलों की जानकारी सामने आई।

इससे स्पष्ट है कि व्यवस्था से शिकायतों का समाधान संभव है। लेकिन प्रदेश स्तर पर 1,07,763 लंबित शिकायतों का आंकड़ा बताता है कि सभी विभागों और जिलों में समान गति से काम नहीं हो रहा है।

8 हजार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था कितनी कारगर?

सरकार के अनुसार CM हेल्पलाइन से करीब 8 हजार अधिकारी जुड़े हैं। इसके अलावा L-1 से L-4 तक शिकायतों को आगे भेजने और वरिष्ठ स्तर पर निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है।

ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि—

कौन से विभाग सबसे ज्यादा शिकायतें लंबित रखे हुए हैं?

किस स्तर के अधिकारी के पास सबसे ज्यादा मामले अटके हैं?

कितनी शिकायतें निर्धारित समय-सीमा पार कर चुकी हैं?

और सबसे महत्वपूर्ण—

कितने मामलों में शिकायतकर्ता समाधान से वास्तव में संतुष्ट है?

इन सवालों के जवाब सामने आने पर ही CM हेल्पलाइन की वास्तविक स्थिति का सही आकलन हो सकेगा।

सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती

CM हेल्पलाइन को सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ा है। ऐसे में 1.07 लाख से अधिक लंबित शिकायतें केवल अधिकारियों की कार्यप्रणाली का आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि यह प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती भी है।

यदि शिकायतें समय पर हल होती हैं तो हेल्पलाइन जनता का भरोसा मजबूत कर सकती है। लेकिन यदि शिकायतें लंबे समय तक लंबित रहती हैं तो लोगों को फिर वही सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं, जिनसे राहत दिलाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था शुरू की गई थी।

अब नजर विभागवार आंकड़ों पर

फिलहाल आधिकारिक डैशबोर्ड का सबसे बड़ा आंकड़ा यही है—

1,76,079 शिकायतें दर्ज
68,316 का निराकरण
1,07,763 अभी लंबित
समाधान दर सिर्फ 39%

अब जरूरत इस बात की है कि सरकार विभागवार और जिलावार लंबित शिकायतों का सार्वजनिक आंकड़ा सामने लाए। इससे पता चलेगा कि सबसे ज्यादा शिकायतें किन विभागों में अटकी हैं और किन अधिकारियों के स्तर पर निराकरण की गति कमजोर है।

क्योंकि CM हेल्पलाइन का असली पैमाना कितनी शिकायतें दर्ज हुईं नहीं, बल्कि कितनी समस्याएं वास्तव में हल हुईं—यह होना चाहिए।

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रुपेश चन्द्रवंशी

रुपेश चन्द्रवंशी

खोजी पत्रकार|लेखक|संपादक
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लेखक/संपादक BJMC (Bachelor of Journalism & Mass Communication) डिग्रीधारी एवं 12 वर्षों से अधिक के मीडिया अनुभव के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेब मीडिया में पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है।

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