जंगल कट रहे और वन अमला गहरी नींद में? कहीं जंगल को खेत में तब्दील करने की साजिश तो नहीं

बोदलपानी के कक्ष क्रमांक 103 में सैकड़ों पेड़ों की कटाई से वन संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल; क्या जंगल की जमीन को खेती में बदलने की तैयारी थी?
कवर्धा। कवर्धा वनमंडल के रेंगाखार वन परिक्षेत्र अंतर्गत बोदलपानी के कक्ष क्रमांक 103 में सैकड़ों पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जंगल में इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के बावजूद यदि वन अमले को समय रहते इसकी भनक नहीं लगी, तो यह महज लापरवाही है या फिर किसी सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जंगल को धीरे-धीरे साफ कर उसकी जमीन को खेत में तब्दील करने की कोशिश की जा रही थी? पेड़ों की कटाई के बाद वन भूमि पर कब्जा कर खेती शुरू करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जांच केवल कटे हुए पेड़ों की गिनती तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि कटाई के बाद जमीन का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाना था और क्या वहां खेती या कब्जे के कोई संकेत मिले हैं।
जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग की है। यदि वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई है, तो यह जांचना जरूरी है कि कटाई कब और कैसे हुई, इसकी जानकारी वन अमले को थी या नहीं और समय रहते रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। यदि निगरानी में लापरवाही, मिलीभगत या जंगल की जमीन को खेती में बदलने की साजिश सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

मामला केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है। जंगलों का लगातार सिमटना वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित करता है। भोजन और सुरक्षित रहवास की कमी होने पर वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ सकते हैं। इसके अलावा, वन भूमि पर अवैध खेती और कब्जे का विस्तार पर्यावरणीय संतुलन के साथ-साथ सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। इसलिए पेड़ों की कटाई, भूमि की स्थिति और संभावित अवैध उपयोग की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
पेड़ों को सीधे काटने के अलावा उन्हें नुकसान पहुंचाकर सुखाए जाने की आशंका भी जांच का विषय हो सकती है। वन विभाग को पेड़ों की स्थिति, कटान के निशान, लकड़ी की निकासी, जमीन पर खेती के संकेत और संबंधित अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब जांच के साथ जवाबदेही भी जरूरी
बोदलपानी के कक्ष क्रमांक 103 में कटाई की वास्तविक स्थिति जानने के लिए मौके का निरीक्षण, कटे पेड़ों की संख्या और प्रजातियों का आकलन, लकड़ी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच तथा वन भूमि की सीमाओं का सत्यापन जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र की निगरानी किन अधिकारियों और कर्मचारियों के जिम्मे थी, कथित कटाई कब से चल रही थी और क्या किसी व्यक्ति या समूह ने जमीन को खेती के लिए तैयार करने की कोशिश की।
यदि अवैध कटाई या वन भूमि पर कब्जे की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ निगरानी में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। जंगलों की सुरक्षा केवल नियमों और दावों से नहीं, बल्कि प्रभावी निगरानी, समय पर कार्रवाई और जवाबदेही से सुनिश्चित होगी। यदि वन अमला समय रहते सक्रिय नहीं हुआ, तो जंगलों के खेतों में बदलने का खतरा लगातार बढ़ता रहेगा।





