पत्रकार संजय यादव पर हमला : फर्जी एफआईआर के खिलाफ पत्रकारों का भीगते पानी में प्रदर्शन, चक्का जाम की चेतावनी

कवर्धा। जिले में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों ने मीडिया जगत को झकझोर दिया है। ताजा मामला पत्रकार संजय यादव पर फैक्ट्री मालिक और उसके गुर्गों द्वारा किए गए जानलेवा हमले का है। यही नहीं, घटना के बाद उल्टा संजय यादव के खिलाफ ही फर्जी एफआईआर दर्ज कर दी गई। इस घटना से आक्रोशित जिलेभर के पत्रकारों ने शनिवार को मूसलाधार बारिश के बीच सिविल लाइन/सिग्नल चौक पर धरना प्रदर्शन कर प्रशासन को अल्टीमेटम दिया।

बारिश में भी डटे रहे पत्रकार
भीषण बारिश के बावजूद पत्रकार करीब 4 से 5 घंटे तक सड़क पर डटे रहे। उनका कहना था कि यह सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और एफआईआर निरस्त करने की मांग उठाई।
एएसपी पहुंचे, दिया कार्रवाई का भरोसा

लगातार हो रहे हंगामे के बीच एएसपी पंकज पटेल और नायब तहसीलदार विकास जैन मौके पर पहुंचे और पत्रकारों को निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि पत्रकारों ने साफ चेतावनी दी कि अगर सोमवार तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम करेंगे।
घटनाक्रम
पत्रकार संजय यादव शुक्रवार को पोड़ी इलाके में न्यूज कवरेज के दौरान प्यास लगने पर एक दुकान से क्षीरपानी नामक पानी की बोतल खरीदी। पानी पीते ही उन्हें उसमें कड़वाहट और खराब स्वाद महसूस हुआ। बोतल पर एक्सपायरी डेट देखनी चाही, लेकिन उसमें एक्सपायरी डेट प्रिंट ही नहीं थी। इसी संदेह के चलते उन्होंने बोतल पर दिए पते के आधार पर हरिनछपरा स्थित कंपनी तक पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू की।
कंपनी परिसर में एसजी मसाला उद्योग का बोर्ड लगा हुआ था, लेकिन अंदर बोतल बनाने का काम चल रहा था। गेट बाहर से बंद था, मगर अंदर लोग काम कर रहे थे। आवाज लगाने पर एक कर्मचारी आया और संजय को अंदर बुलाया। वहां उनसे आईडी कार्ड दिखाने को कहा गया। इसके बाद कंपनी मालिक ने मीडिया कैमरे के सामने बाइट भी दिया।
लेकिन जैसे ही संजय यादव बाहर आकर कैमरे के सामने खबर का कनक्लूजन रिकॉर्ड कर रहे थे, उसी दौरान कंपनी मालिक और कर्मचारियों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने संजय की गर्दन पकड़ ली और कैमरामैन का हाथ मरोड़ दिया। संजय को ऑफिस की तरफ घसीटने का प्रयास किया गया। हालांकि कैमरामैन किसी तरह भाग निकला। इसी बीच मालिक ने संजय यादव का मोबाइल छीन लिया।
जान बचाकर बाहर निकले संजय यादव ने तुरंत डीएसपी कृष्णा चंद्राकर को कॉल कर घटना की जानकारी दी। डीएसपी ने उन्हें 112 पर कॉल करने कहा। संजय ने साथी पत्रकारों को भी सूचना दी, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे।
कुछ देर बाद पुलिस टीम और डीएसपी घटनास्थल पहुंचे और वहीं दबाव में कंपनी मालिक ने संजय यादव का छीना हुआ मोबाइल वापस किया। डीएसपी द्वारा कंपनी परिसर से सीसीटीवी हार्डडिस्क जब्त कर आरोपी संदीप गुप्ता को क्राइम ब्रांच लाया गया।
रात करीब 11 बजे पत्रकार संघ के विरोध और शोरगुल के बीच आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन इसी बीच यह खुलासा हुआ कि आरोपी ने संजय यादव के खिलाफ भी फर्जी शिकायत दर्ज कर दी थी। पत्रकारों ने इसे साजिश करार दिया।
अगले दिन यानी 20 सितंबर को पत्रकारों की बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि पत्रकारों की आत्मसम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए ज्ञापन सौंपा जाए और सांकेतिक धरना दिया जाए। साथ ही प्रशासन को सोमवार तक का समय दिया गया। पत्रकारों ने साफ कहा है कि यदि तब तक कार्रवाई नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।
प्रमुख मांगें
- पत्रकार संजय यादव पर दर्ज फर्जी एफआईआर तत्काल निरस्त हो।
- छीरपानी वाटर बॉटल और एस.जी. मसाला उद्योग की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
- भविष्य में पत्रकारों पर हमले की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई हो।
पत्रकारों की चेतावनी
पत्रकारों ने कहा कि यदि प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। उनका कहना था – “पत्रकार पर हमला एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र पर हमला है। चौथा स्तंभ चुप नहीं बैठेगा।”



