शिक्षा गुणवत्ता को लेकर कबीरधाम-बेमेतरा की संयुक्त बैठक, बच्चों को केन्द्र में रखकर बनेगी नई राह

बाल देवो भवः के मंत्र से सजेगा शिक्षा गुणवत्ता अभियान
कवर्धा। शिक्षा सुधार की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्राथमिकताओं में शामिल “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान 2025” अब दुर्ग संभाग में भी नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। सोमवार को कवर्धा स्थित शासकीय पीजी कॉलेज के ऑडिटोरियम में कबीरधाम और बेमेतरा जिलों के शिक्षा अमले की संयुक्त बैठक ने इस अभियान को दिशा देने का कार्य किया।
बच्चों के सम्मान से शुरू होगा सुधार का अध्याय
बैठक का मूल मंत्र रहा – “बाल देवो भवः”। यह सूत्र वाक्य केवल एक नारा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बच्चों को केन्द्र में रखकर नीति निर्धारण का स्पष्ट संदेश है। तय किया गया कि 13 सितंबर तक यह संदेश संभाग के प्रत्येक विद्यालय की दीवारों पर अंकित होगा।
संयुक्त संचालक शिक्षा, दुर्ग संभाग हेमंत उपाध्याय ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा – “शिक्षण कार्य ईश्वरोपासना है, और इस साधना में छात्र ही सर्वोच्च स्थान पर होने चाहिए।”
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सख्त निर्देश
श्री उपाध्याय ने साफ शब्दों में कहा कि विद्यालय का प्रशासनिक संचालन, समयबद्ध परीक्षा आयोजन और शिक्षक-छात्र संबंधों को प्रगाढ़ बनाना अब प्राचार्यों की सीधी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने प्रार्थना सभा को नीरस औपचारिकता से बाहर निकालकर इसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी मंच बनाने पर बल दिया। शैक्षिक दैनंदिनी के संधारण और नियमित निरीक्षण की अनिवार्यता भी रेखांकित की गई।
सघन मॉनिटरिंग बनेगी रीढ़
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय रहा—सघन एवं सतत मॉनिटरिंग व्यवस्था।
- अब हर बीईओ, डीईओ और संकुल समन्वयक सप्ताह में न्यूनतम तीन दिन विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे।
- निरीक्षण के दायरे में आएंगे—शिक्षक व विद्यार्थियों की उपस्थिति, अध्यापन की तैयारी, विद्यालय की स्वच्छता, मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और शिक्षण सामग्री की उपलब्धता।
- कमजोर छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं और परामर्श की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
- हर निरीक्षण रिपोर्ट व्हाट्सएप ग्रुप में साझा होगी और ब्लॉक, जिला एवं संभाग स्तर पर ग्रेडिंग प्रणाली से आंकी जाएगी।
डी ग्रेड वाले विद्यालयों पर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई होगी। यह व्यवस्था अब तक की शिक्षा मॉनिटरिंग से कहीं अधिक सख्त और परिणामोन्मुख मानी जा रही है।
“एक दुर्ग संभाग श्रेष्ठ” – साझा लक्ष्य
श्री उपाध्याय ने कहा कि अब लक्ष्य स्पष्ट है – “एक दुर्ग संभाग श्रेष्ठ।” यानी संभाग को शिक्षा गुणवत्ता में प्रदेश का अग्रणी बनाना। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मानदेय भुगतान में ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी और प्राचार्य व आहरण संवितरण अधिकारी समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करें।
संकल्प के साथ हुआ समापन
करीब 700 अधिकारियों-कर्मचारियों की मौजूदगी वाली इस बैठक का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ—दुर्ग संभाग को शिक्षा गुणवत्ता की दृष्टि से उत्कृष्ट बनाना ही अब सबकी जिम्मेदारी है।



