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एनएचएम कर्मचारियों का आंदोलन 13वें दिन भी जारी – सेवाएं ठप, जनजीवन प्रभावित, सरकार पर दबाव

रायपुर/कवर्धा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन 13वें दिन भी जारी है और यह धीरे-धीरे और उग्र रूप लेता जा रहा है। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं हो जाता, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार ने “मोदी की गारंटी” के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन उन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया। संघ का आरोप है कि 160 से अधिक बार ज्ञापन देने के बावजूद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी के चलते प्रदेश के 33 जिलों के करीब 16,000 कर्मचारी 18 अगस्त से हड़ताल पर हैं। 29 अगस्त को रायपुर और दुर्ग संभाग के साथ कवर्धा जिले के 180 कर्मचारी भी राजधानी रायपुर के तुता धरना स्थल पर शामिल हुए और आम जनता के बीच पंपलेट वितरित कर आंदोलन की जानकारी दी।

स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने से आम जनता को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री के उस दावे को भ्रामक बताया है, जिसमें कहा गया था कि उनकी पांच मांगें पूरी कर दी गई हैं। हड़ताली कर्मचारी लिखित आदेश जारी करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

प्रमुख मांगें

एनएचएम कर्मचारियों की मुख्य मांगों में—

  • नियमितिकरण,
  • लंबित 27% वेतन वृद्धि,
  • ग्रेड पे का निर्धारण,
  • अनुकंपा नियुक्ति,
  • एवं अन्य 10 सूत्री मांगें शामिल हैं।

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि वे अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और सरकार का “दमनकारी रवैया” उन्हें डराने में नाकाम रहेगा।

नोटिस के बाद भी अडिग

29 अगस्त को स्वास्थ्य सचिव ने सभी हड़ताली कर्मचारियों को ड्यूटी ज्वाइन करने का नोटिस जारी किया और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बावजूद हड़ताल में शामिल कर्मचारियों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। कर्मचारियों का कहना है—“हड़ताल हमारा शौक नहीं है, बल्कि मजबूरी है।”

सांसद विजय बघेल का समर्थन

घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष एवं सांसद विजय बघेल ने भी कर्मचारियों की मांगों को जायज ठहराया है। उन्होंने टीवी इंटरव्यू में कहा कि “घोषणा पत्र में जो वादा किया गया था, उसे पूरा होना चाहिए।” बघेल ने मंत्री से इस विषय पर पत्र और वार्ता की मांग की है और कहा है कि वे स्वयं मुख्यमंत्री से इस बारे में चर्चा करेंगे।

आंदोलन में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भागीदारी

आज के प्रदर्शन में शशिकांत शर्मा, जेम्स जॉन, प्रदीप सिंह ठाकुर, विनिष जॉय, सौरभ तिवारी, मुकुंद राव, आनंद दास महंत, डॉ. चंचला, डॉ. प्रशांत, डॉ. मुकेश खूंटे, डॉ. निलेश चंद्रवंशी, डॉ. गौरव बघेल, डॉ. ममता ठाकुर, डॉ. दीपक ध्रुव, रुपेश साहु, संगीता भगत, भवानी सिंह, शिल्पा बक्शी, नेहा चंद्रवंशी, राजेश्वरी गुप्ता, नितिन सोनी, महेंद्र चंद्रवंशी, वेद चंद्राकर समेत सैकड़ों कर्मचारी शामिल रहे।

हड़ताल की वजह से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं और आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अब यह देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर ठोस पहल करती है या आंदोलन और ज्यादा उग्र रूप लेगा।


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