UPI पर MDR का विरोध: छत्तीसगढ़ में सराफा और पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने जताई आपत्ति, फैसला वापस लेने की मांग

रायपुर। UPI भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर छत्तीसगढ़ में व्यापारिक संगठनों ने विरोध जताया है। सराफा एसोसिएशन और पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने इस व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज कराते हुए सरकार से फैसला वापस लेने या व्यापारियों को इससे राहत देने की मांग की है।
केंद्र के नए UPI ढांचे के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के Person-to-Merchant यानी P2M भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ऐसे लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। वहीं व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान पर MDR नहीं लगेगा और ₹2,000 तक के P2M भुगतान भी शून्य MDR के दायरे में रहेंगे।
पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए व्यवस्था अलग रखी गई है। ₹2,000 से अधिक के पात्र ईंधन भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR प्रस्तावित है। इसी को लेकर पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि ईंधन कारोबार पहले से तय और सीमित मार्जिन पर चलता है, इसलिए हर डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त लागत का असर सीधे कारोबार पर पड़ सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी केंद्र से पेट्रोल पंपों को MDR और संबंधित ट्रांजैक्शन फीस से छूट देने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ में सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष धरमचंद भंसाली ने MDR व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि व्यापारियों पर लागत बढ़ने की स्थिति में उसका असर ग्राहकों तक पहुंचने की आशंका है। पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिल घगट ने भी विरोध जताते हुए बताया कि इस मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र भेजा गया है और सरकार के जवाब के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सरकार का पक्ष यह है कि MDR ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था के भीतर बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
फिलहाल विवाद का मुख्य सवाल यही है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच UPI व्यवस्था की लागत का भार किस पर पड़ेगा और छोटे मार्जिन वाले कारोबारों को इससे कितना असर होगा। छत्तीसगढ़ के व्यापारिक संगठनों की आपत्ति के बाद अब केंद्र सरकार के जवाब पर नजर है।





