RTE में हैबिटेशन कोड का खेल? ग्रामीण स्कूल को शहरी दिखाकर सीट आवंटन में गड़बड़ी का आरोप

कवर्धा। जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों में होने वाले प्रवेश को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शिक्षा सत्र 2025-26 समेत पूर्व के वर्षों में नियमों को दरकिनार कर कुछ निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाने का मामला उठाया गया है। आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्र में संचालित स्कूलों को आरटीई पोर्टल पर तकनीकी हेरफेर कर शहरी क्षेत्र का दर्शाया गया, जिससे सीटों के आवंटन और पात्रता प्रक्रिया पर असर पड़ा।
युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी के नेतृत्व में कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में कहा गया है कि और के मामले में आरटीई पोर्टल पर गलत हैबिटेशन कोड (एचबी 12049) दर्ज कर स्कूलों को रामनगर, कवर्धा के शहरी क्षेत्र से संबद्ध दिखाया गया। जबकि एक स्कूल ग्रामीण क्षेत्र महाराजपुर और दूसरा वर्तमान में ग्राम मजगांव में संचालित बताया गया है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया नोडल अधिकारियों और तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी की मिलीभगत से की गई। आवेदन में कहा गया है कि इससे स्थानीय और पात्र गरीब बच्चों के अधिकारों का हनन हुआ है, क्योंकि आरटीई के तहत सीटें स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित होती हैं।
आवेदन में यह भी उल्लेख है कि 19 अगस्त 2025 को इस संबंध में लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन उस समय मामले पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे दोषियों के हौसले और बढ़े।
अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही निजी स्कूलों के साथ मिलकर गड़बड़ी करेंगे तो गरीब बच्चों को न्याय कैसे मिलेगा। पूरे जिले के आरटीई पोर्टल की मैपिंग का तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की गई है, ताकि शहरी-ग्रामीण कोड की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित नोडल अधिकारियों और तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी को सेवा से हटाने, संबंधित स्कूलों की मान्यता रद्द करने और आर्थिक दंड लगाने की मांग की है।
जिला प्रशासन ने दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पात्र विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।



