कवर्धा विशेषक्राइम सेल

फर्जी कंपनी का MD बनकर 5.51 लाख की ठगी — कबीरधाम पुलिस की शानदार कार्रवाई, मुख्य आरोपी मिर्जापुर से दबोचा गया

कवर्धा। कबीरधाम पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर और आर्थिक अपराधियों की कितनी भी लंबी छलांग क्यों न हो, कानून की पकड़ से वे बच नहीं सकते। पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने जिले में बढ़ते ऑनलाइन ठगी मामलों पर बड़ा प्रहार किया है।

कवर्धा के महावीर स्वामी चौक निवासी नवीन जैन से 5.51 लाख की ठगी कर फरार हुए आरोपी मनोज श्रीवास्तव, निवासी गोरखपुर (उ.प्र.) और वर्तमान में गाजियाबाद में रहने वाला, आखिरकार कबीरधाम पुलिस की पकड़ में आ गया। आरोपी खुद को काव्या इंडस्ट्रीज का मैनेजिंग डायरेक्टर बताकर सुपर डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का झांसा देता था। फर्जी टैक्स इनवॉइस, ई-वे बिल, जीएसटी दस्तावेज और कंपनी के नाम से मेल भेजकर वह भरोसा जीतने का नाटक रचता था।

लेकिन जब प्रार्थी नवीन जैन खुद लखनऊ स्थित तथाकथित कंपनी के पते पर पहुँचे, तो पूरी हकीकत खुलकर सामने आ गई—ऐसी कोई कंपनी वहां मौजूद ही नहीं थी।

बिहार से लेकर यूपी तक पीछा—आखिरकार चुनार (मिर्जापुर) में घेरा

कवर्धा पुलिस ने अपराध क्रमांक 87/2024, धारा 420 भा.द.वि. के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। आरोपी की लोकेशन मिलते ही टीम बिहार के पूर्वी चंपारण तक पहुँची, लेकिन आरोपी वहाँ से फरार हो गया।

पुलिस ने हार नहीं मानी—लगातार तकनीकी निगरानी, मूवमेंट ट्रैकिंग और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर 21 नवंबर की रात यूपी के चुनार, जिला मिर्जापुर से आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।

पूछताछ में आरोपी ने ठगी स्वीकार की और बताया कि रकम का इस्तेमाल उसने अपने साथी संजीव मिश्रा (प्रतापगढ़, उ.प्र.) के साथ मिलकर किया है। संजीव मिश्रा फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

आदतन ठग — कई राज्यों में फैला नेटवर्क

जांच में सामने आया कि मनोज श्रीवास्तव कई राज्यों में इसी तरह लोगों को चूना लगा चुका है। फर्जी कंपनियों के नाम पर ‘डिस्ट्रीब्यूटरशिप’ और ‘बिजनेस पार्टनरशिप’ का झांसा देकर लाखों ऐंठना इस गिरोह की खास रणनीति थी।

कवर्धा पुलिस ने आरोपी को 22 नवंबर की रात 9 बजे विधिवत गिरफ्तार किया और परिजनों को सूचना भी दे दी गई।

ऑपरेशन की रीढ़ — यह रही पूरी टीम

कार्रवाई में थाना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक योगेश कश्यप, ASI राजकुमार चंद्रवंशी, DSB से ASI संदीप चौबे, HC चुम्मन साहू, और अभिनव तिवारी की भूमिका बेहद सराहनीय रही।

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