कवर्धा में मुरुम माफिया का बोलबाला: प्रशासन मिलीभगत में या बेखबर? खुली आंखों के सामने पर्यावरण की लूट जारी

कवर्धा। कबीरधाम जिले में अवैध मुरुम खनन का कारोबार लगातार तेज़ी से फल-फूल रहा है। सरोधा मार्ग स्थित आईटीआई कॉलेज के पीछे 2–3 एकड़ क्षेत्र में महीनों से चल रहे इस गैरकानूनी उत्खनन ने प्रशासन और खनिज विभाग की निष्क्रियता को उजागर कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रतिदिन दर्जनों ट्रक मुरुम भरकर कवर्धा शहर की ओर जा रहे हैं, जो जिले के तहसील, एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय के सामने से होकर प्रतिदिन गुजर रही है लेकिन प्रशासन इस बड़े पैमाने पर चल रही खुली लूट पर आंख बंद किए बैठा है।
प्रतिबंधित क्षेत्र में धड़ल्ले से उत्खनन

ग्राम तारो अंतर्गत आईटीआई परिसर के पीछे का यह इलाका शैक्षणिक संस्थानों, आवासीय बस्तियों और कृषि भूमि से घिरा है। नियम के अनुसार यहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद सुबह से देर रात तक जेसीबी और डंपरों की आवाजाही जारी है, मानो इस क्षेत्र को “नो-रूल ज़ोन” बना दिया गया हो।
अवैध खनन के कारण सरकारी खजाने को लाखों–करोड़ों का नुकसान, पर्यावरण को गंभीर हानि और भूमि संरचना को स्थायी क्षति पहुँच रही है।
खनिज विभाग पर गंभीर आरोप – मिलीभगत का संदेह
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पूरा खेल खनिज विभाग की जानकारी और संरक्षण में चल रहा है। “पिछले 6 महीनों से बिना रोक-टोक बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन जारी है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सांठगांठ का परिणाम है।”
ग्रामीणों के अनुसार इस खनन से मोटी रकम वसूली का खेल चलता है, जिसमें अधिकारियों व दलालों की भूमिका संदेहास्पद है।
कांग्रेस का प्रशासन पर तीखा हमला

अवैध उत्खनन के विरोध में मौका स्थल पर पहुंचे युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने कहा कि :
“कवर्धा में खनन माफिया हजारों ट्रकों में मुरुम की लूट कर रहा है।
बीजेपी नेताओं के संरक्षण में अवैध उत्खनन चल रहा है और खनिज विभाग गहरी नींद में सोया है।”
वहीं मणिकांत (ब्लॉक कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष) ने कहा कि :
“सरकारी संरक्षण के कारण अवैध खनन बढ़ा है।
ग्रामीण और शहरी नागरिकों में भारी आक्रोश है।
प्राकृतिक संसाधनों की लूट और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है।”
मौके पर तुकेश्वर साहू, सुनील सेन, नेतु धुर्वे, अश्वनी कौशिक, दिनेश पाली, बबला सहित अन्य भी उपस्थित रहे।
जनता के सवाल – प्रशासन मौन क्यों?
- शहर से सिर्फ 5 किमी दूर हो रहा अवैध खनन क्या प्रशासन को नहीं दिखता?
- खनिज विभाग की चुप्पी क्या उसकी मिलीभगत का संकेत है?
- जेसीबी और ट्रकों की आवाजाही पर कार्रवाई क्यों नहीं?
- बेधड़क अवैध खनन पर कौन करेगा जवाबदेही तय? जिम्मेदार की खामोशी जनता को और अधिक संदेह में डाल रही है।



