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RTE प्रवेश में गड़बड़ी का खुलासा, दो निजी स्कूलों पर जांच में मिली अनियमितताएं; कार्रवाई की अनुशंसा, फिर भी अब तक ठोस कदम नहीं

कवर्धा। शिक्षा सत्र 2025–26 में आरटीई (निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम) के तहत प्रवेश प्रक्रिया में जिले के दो निजी स्कूलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट में गुरुकुल पब्लिक स्कूल, महाराजपुर और अशोका पब्लिक स्कूल, मजगांव द्वारा गलत हैबिटेशन कोड दर्ज कर प्रवेश प्रक्रिया में हेरफेर किए जाने की पुष्टि हुई है। मामले में संबंधित विद्यालय प्रबंधन और नोडल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।

इस संबंध में युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी एवं अन्य कार्यकर्ताओं द्वारा 19 अगस्त 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत दी गई थी। शिकायत के आधार पर मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई, जिसमें भोरमदेव कन्या परिसर महाराजपुर और स्वामी करपात्री जी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कवर्धा के प्राचार्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई।

जांच में सामने आया कि गुरुकुल पब्लिक स्कूल, महाराजपुर ने स्वयं को ग्रामीण क्षेत्र में संचालित बताते हुए भी आरटीई पोर्टल में गलत हैबिटेशन कोड HB12049 दर्ज किया, जिससे उसे शहरी क्षेत्र रामनगर, कवर्धा के अंतर्गत प्रदर्शित किया गया। इसी प्रकार, अशोका पब्लिक स्कूल, जो वर्तमान में ग्राम मजगांव में संचालित है, ने भी वही गलत कोड दर्ज कर स्वयं को शहरी क्षेत्र में दर्शाया। जबकि दोनों विद्यालयों के वास्तविक हैबिटेशन कोड क्रमशः HB04634 और HB04725 हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रकार की गड़बड़ी से प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हुई और पात्र बच्चों के स्थान पर अन्य क्षेत्रों के बच्चों के चयन की संभावना बढ़ गई। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों द्वारा शहरी क्षेत्र के छात्रों को प्रवेश दिए जाने से नियमों का उल्लंघन हुआ है। जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि समय रहते नोडल अधिकारियों द्वारा इस त्रुटि को ठीक नहीं किया गया, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

जांच समिति ने विद्यालय प्रबंधन और संबंधित नोडल अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की है। साथ ही भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए त्रि-स्तरीय सत्यापन प्रणाली लागू करने की जरूरत बताई गई है, जिसमें विद्यालय, नोडल अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर सख्त जांच शामिल हो।

इधर, युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई नहीं की गई है। संगठन ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कथित रूप से संरक्षण दिए जाने के कारण मामला दबा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

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