
कवर्धा। बोड़ला ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र में बेशकीमती सराई (साल) के पेड़ों की खुलेआम कटाई ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजाढार से बोक्करखार मार्ग पर सड़क किनारे ही एक विशाल पेड़ को गिरा दिया गया है, जबकि करीब 15 पेड़ों को नीचे से गोलाई में काटकर सूखने के लिए छोड़ दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि यह सब मुख्य मार्ग से सटे क्षेत्र में हो रहा है, जहां से रोज ग्रामीण और राहगीर गुजरते हैं। बावजूद इसके न तो समय पर रोकथाम हुई और न ही अब तक जिम्मेदारी तय हुई है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि निगरानी तंत्र आखिर कर क्या रहा है। यदि सड़क किनारे पेड़ सुरक्षित नहीं हैं, तो अंदरूनी जंगलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब सवाल यही है कि क्या विभाग जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या फिर अधिकारी एसी कमरे में बैठकर आराम फरमाते रहेंगे।
ऐसे चलता है ‘धीमी कटाई’ का खेल: पहले गोलाई, फिर सूखने का इंतजार
जानकार बताते हैं कि पेशेवर तस्कर सीधे पेड़ काटने के बजाय पहले उसकी छाल और निचली परत को चारों ओर से गोलाई में काट देते हैं। इस प्रक्रिया से पेड़ की जड़ों तक पोषण पहुंचना बंद हो जाता है और वह धीरे-धीरे सूखने लगता है। कुछ हफ्तों बाद जब पेड़ पूरी तरह सूख जाता है, तो उसे “सूखी लकड़ी” बताकर आसानी से काट लिया जाता है। इससे तस्करों पर तत्काल संदेह भी कम होता है और वे बड़ी मात्रा में इमारती लकड़ी ठिकाने लगा देते हैं। राजाढार–बोक्करखार मार्ग पर भी इसी पैटर्न में पेड़ों को निशाना बनाया गया है, जो संगठित तस्करी की ओर इशारा करता है।



