कबीरधाम में धान खरीदी पर फिर सवाल: बिड़ोरा केंद्र में 22 लाख की गड़बड़ी, सिस्टम की पारदर्शिता कटघरे में

कवर्धा। जिले में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं के कारण चर्चा में है। बिडोरा धान उपार्जन केंद्र में भौतिक सत्यापन के दौरान 22 लाख 26 हजार रुपए से अधिक मूल्य के धान की कमी सामने आई है। लगातार उजागर हो रहे ऐसे मामलों ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में सेवा सहकारी समिति बिडोरा के अंतर्गत धान खरीदी प्रभारी के रूप में अर्जुन यादव पदस्थ थे। 26 फरवरी 2026 को मंडी उप निरीक्षक और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। जांच के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज धान और वास्तविक भंडारण में बड़ा अंतर पाया गया।
ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में 65045 बोरा धान होना चाहिए था, जबकि मौके पर मात्र 62664 बोरा ही मिला। इस तरह कुल 2381 बोरा, यानी करीब 952 क्विंटल धान की कमी पाई गई। समर्थन मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 22.26 लाख रुपए से अधिक आंकी गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि निरीक्षण के दौरान खरीदी प्रभारी मौके पर मौजूद नहीं थे। समिति प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक चूक है, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान हुआ है।
इससे पहले जिले के बघर्रा, बाघामुड़ा और रमतला उपार्जन केंद्रों में भी करीब 4472 क्विंटल धान गायब मिलने का मामला सामने आ चुका है, जिसकी कीमत एक करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई थी। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मामले में कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए बिडोरा समिति की प्रोत्साहन राशि काटने, गायब धान की वसूली करने, संबंधित प्रभारी को ब्लैकलिस्ट करने और केंद्र को संवेदनशील सूची में शामिल करने की बात कही गई है। साथ ही दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
इधर, कांग्रेस ने इस पूरे मामले को सुनियोजित भ्रष्टाचार करार देते हुए जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लगातार सामने आ रहे घोटालों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर धान खरीदी के नाम पर यह गड़बड़ी कब तक जारी रहेगी।



