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धान खरीदी में बड़ा खेल: 4472 क्विंटल धान गायब, 1.06 करोड़ की हेराफेरी उजागर

कवर्धा। कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भौतिक सत्यापन में तीन उपार्जन केंद्रों—बघर्रा, बाघामुड़ा और रमतला—में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। जांच में कुल 4471.98 क्विंटल धान का हिसाब नहीं मिला, जिसकी कीमत समर्थन मूल्य के आधार पर 1.06 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार तीनों केंद्रों में एक ही पैटर्न सामने आया। ऑनलाइन पोर्टल में धान खरीदी का पूरा रिकॉर्ड और भुगतान दर्ज है, लेकिन मौके पर भौतिक सत्यापन के दौरान उतना धान गोदाम में मौजूद नहीं मिला। हजारों क्विंटल का यह अंतर सीधे तौर पर फर्जी खरीदी और रिकॉर्ड में हेरफेर की ओर इशारा करता है।

बघर्रा केंद्र में 1251.18 क्विंटल धान कागजों में खरीदी दिखाया गया, लेकिन वास्तविकता में स्टॉक नहीं मिला। इस आधार पर करीब 29.64 लाख रुपए का भुगतान उठाया गया। बाघामुड़ा केंद्र में सबसे बड़ी गड़बड़ी सामने आई, जहां 1929.20 क्विंटल धान की कमी मिली, जिसकी कीमत 45.70 लाख रुपए से अधिक है। वहीं रमतला केंद्र में 1291.60 क्विंटल धान का हिसाब नहीं मिला, जिससे 30.60 लाख रुपए का नुकसान सामने आया।

जांच में यह भी सामने आया कि खरीदी प्रभारी और संबंधित कर्मचारियों ने मिलकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया। पुराने स्टॉक को नया दिखाना और बिना खरीदी के भुगतान निकालना जैसे तरीके अपनाए गए। रिपोर्ट में इसे सुनियोजित और संगठित आर्थिक अपराध बताया गया है।

धान खरीदी व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है, लेकिन इस तरह की गड़बड़ी से सीधे किसानों को नुकसान हो रहा है। फर्जी खरीदी के कारण वास्तविक किसानों को भुगतान में देरी और खरीदी में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

संयुक्त जांच टीम ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की है। साथ ही गड़बड़ी की राशि की वसूली और संबंधित केंद्रों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू करने की बात कही गई है। कलेक्टर न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है।

वहीं युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने पूरे जिले के सभी 108 उपार्जन केंद्रों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े स्तर पर धान खरीदी केंद्रों और राइस मिलरों की मिलीभगत से घोटाला किया जा रहा है।

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