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14 हजार क्विंटल धान गायब, ₹3.55 करोड़ का नुकसान… फिर भी कार्रवाई नहीं! करपीगोडान केंद्र के प्रभारी पर प्रशासन मेहरबान क्यों?

कवर्धा। कबीरधाम जिले में धान खरीदी केंद्रों में शॉर्टेज मिलने पर जहां अन्य केंद्र प्रभारियों पर एफआईआर, निलंबन और रिकवरी जैसी सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं करपीगोडान धान उपार्जन केंद्र के प्रभारी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, खरीदी वर्ष 2021-22 में करपीगोडान केंद्र में तत्कालीन प्रभारी मार्तंड सिंह ठाकुर के कार्यकाल के दौरान 14,184.60 क्विंटल धान की शॉर्टेज सामने आई थी। अगर इस कमी को उस समय की राज्य खरीदी दर ₹2,500 प्रति क्विंटल से आंका जाए, तो इसकी अनुमानित कीमत करीब ₹3 करोड़ 55 लाख (₹3,54,61,500) बैठती है। यह मात्रा सामान्य गड़बड़ी नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान की ओर इशारा करती है। इसके बावजूद आज तक न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही रिकवरी या विभागीय कार्रवाई की पुष्टि हो सकी है।

इधर, जिले के अन्य धान खरीदी केंद्रों में कम मात्रा की कमी पाए जाने पर भी प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कई मामलों में केंद्र प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, निलंबन और राशि वसूली की कार्रवाई की गई है। ऐसे में 14 हजार क्विंटल से ज्यादा की कमी के मामले में चुप्पी प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय किसानों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब छोटे मामलों में कड़ी कार्रवाई हो सकती है तो इतने बड़े शॉर्टेज पर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं? क्या किसी दबाव या संरक्षण के चलते मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है?

अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज कर रिकवरी और दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और दोषियों को संरक्षण मिलने की धारणा खत्म हो।


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रुपेश चन्द्रवंशी

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लेखक/संपादक BJMC (Bachelor of Journalism & Mass Communication) डिग्रीधारी एवं 12 वर्षों से अधिक के मीडिया अनुभव के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेब मीडिया में पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है।

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