2 करोड़ की सड़क 6 महीने में तबाह! ठेकेदार–अफसरों की मिलीभगत उजागर

कवर्धा। जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत चल रही पीएम जन मन योजना की सड़कों में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई जा रही सड़कों की हालत महज कुछ महीनों में ही बदतर हो चुकी है। प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया है कि इन निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता का अभाव है तथा यह पूरा खेल ठेकेदारों और अफसरों की मिलीभगत से संचालित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि “उपअभियंता पर तो खानापूर्ति के लिए निलंबन की कार्रवाई कर दी गई, लेकिन ठेकेदारों और उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?” आकाश केशरवानी का कहना है कि उच्च अधिकारियों को बचाने में कवर्धा विधायक स्वयं जुटे हुए हैं।
दलदली–केसमर्दा–रबदा सड़क बना भ्रष्टाचार का प्रतीक

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान के अंतर्गत दलदली से केसमर्दा होकर रबदा तक 2.10 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति दी गई थी। इस निर्माण के लिए ₹119.97 लाख रुपये निर्माण लागत एवं ₹9.91 लाख रुपये संधारण मद के तहत स्वीकृत हुए थे। कार्य की प्रारंभ तिथि 1 मार्च 2024 तथा पूर्णता तिथि 15 मार्च 2025 निर्धारित की गई थी।
लेकिन, प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने बताया कि महज़ पांच से छह माह पहले बनी यह दलदली–केसमर्दा–रबदा मार्ग की सड़क अब जर्जर हो चुकी है। सड़क से डामर की परत गायब है, झाड़ू लगाते ही गिट्टियाँ बाहर आ जाती हैं, और कई स्थानों पर सड़क की परतें उखड़ने लगी हैं। यह निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

निरीक्षण रिपोर्ट में खुली पोल – “कार्य अत्यंत असंतोषजनक और निम्न स्तर का”
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विकासखंड बोड़ला के पैकेज क्रमांक CG-09/127 (जनमन) अंतर्गत दलदली मेन रोड से केसमर्दा होकर रबदा तक निर्मित की जा रही सड़क का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कार्य की गुणवत्ता अत्यंत असंतोषजनक एवं निम्न स्तर की है।
यह रिपोर्ट आकाश केशरवानी के आरोपों को पुष्ट करती है कि निर्माण कार्य में न तो तकनीकी मानकों का पालन किया गया और न ही गुणवत्ता नियंत्रण के नियमों का अनुपालन हुआ।
सड़कों की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
आकाश केशरवानी ने कहा कि कवर्धा जिले के वनांचल एवं दुर्गम क्षेत्रों में बन रही ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। इन क्षेत्रों में न तो नियमित निरीक्षण हो पा रहा है और न ही तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा —
“अधिकारी प्रायः केवल औपचारिक निरीक्षण कर अपने कर्तव्य की पूर्ति मान लेते हैं। परिणामस्वरूप, करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ने लगती हैं।”
आकाश ने यह भी कहा कि जब तक इन दुर्गम इलाकों में गुणवत्तापूर्ण निरीक्षण और जवाबदेही की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक यह उम्मीद करना व्यर्थ है कि ग्रामीण सड़कों की स्थिति बेहतर होगी।
“ग्रामीणों के लिए विकास नहीं, दिखावा बन गई योजना”
उन्होंने कहा कि पीएम जन मन योजना के तहत बनने वाली सड़कों पर गुणवत्ता और जवाबदेही की भारी कमी है। ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं, अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं, और जनप्रतिनिधि इस मिलीभगत पर मौन हैं। ग्रामीणों के लिए यह योजना “विकास का प्रतीक नहीं बल्कि विकास का दिखावा” बनकर रह गई है।



