भवन अनुज्ञा के नाम पर कथित रिश्वतखोरी का आरोप, नियमों के जाल में उलझी जनता तो कैसे रुकेगा अवैध निर्माण?

कवर्धा नगर पालिका के उप अभियंता के खिलाफ कलेक्टर से शिकायत; आवेदक ने लगाए पैसे मांगने, फाइल अटकाने और एफडीआर वापसी में कमीशन मांगने के आरोप
कवर्धा। शहर में अवैध निर्माण रोकने और नगर पालिका का राजस्व बढ़ाने के लिए भवन अनुज्ञा की प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाना जरूरी है। लेकिन जब भवन निर्माण की अनुमति लेने पहुंचे नागरिकों को ही कथित रूप से पैसों की मांग, फाइलों में कमियां निकालने और बार-बार दफ्तर के चक्कर लगाने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़े, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कवर्धा नगर पालिका परिषद के उप अभियंता शिव गर्ग के खिलाफ कलेक्टर से की गई शिकायत ने इसी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। शिकायतकर्ता बसंत बंजारे ने भवन अनुज्ञा जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने सहित कई आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच का परिणाम अभी सामने नहीं आया है।
अनुमति की प्रक्रिया कठिन तो अवैध निर्माण को मिल सकता है बढ़ावा
नगर पालिका की जिम्मेदारी केवल अवैध निर्माण पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को वैध तरीके से निर्माण कराने के लिए सहज व्यवस्था उपलब्ध कराना भी है। भवन अनुज्ञा के नियम स्पष्ट हों, आवेदन की प्रक्रिया सरल हो और निर्धारित समय में फाइल का निपटारा हो, तो लोग अनुमति लेने के लिए आगे आते हैं। इसके उलट, यदि आवेदकों को नियमों और प्रक्रियाओं के नाम पर लगातार उलझाया जाए या फाइल आगे बढ़ाने के लिए कथित रूप से अतिरिक्त रकम मांगी जाए, तो व्यवस्था से लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
कवर्धा में भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को लेकर सामने आई शिकायत इसी चिंता को उजागर करती है। सवाल यह है कि क्या पालिका की प्रक्रिया आम नागरिकों के लिए इतनी सहज है कि वे बिना परेशानी अनुमति ले सकें? यदि वैध निर्माण की अनुमति लेना ही लोगों के लिए मुश्किल बन जाए, तो अवैध निर्माण रोकने की मुहिम को प्रभावी बनाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

महंगाई के बीच मकान बनाना, टैक्स के बाद कथित कमीशन का बोझ
आज निर्माण सामग्री, मजदूरी और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी के बीच अपना मकान बनाना आम परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती है। इसके साथ भवन अनुज्ञा शुल्क, कर और अन्य वैधानिक खर्च भी वहन करने पड़ते हैं। ऐसे में यदि किसी नागरिक को अनुमति की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आधिकारिक शुल्क से अलग कथित रूप से रिश्वत देनी पड़े, तो यह उसके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है।
शिकायतकर्ता बसंत बंजारे का आरोप है कि उनकी आवासीय भवन अनुज्ञा की फाइल के निर्धारण से पहले 2 हजार रुपए दिए जा चुके हैं, इसके बावजूद आगे की प्रक्रिया और अनुमति जारी करने के लिए 3 हजार रुपए की मांग की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रकम नहीं देने पर फाइल में नई-नई कमियां बताकर कार्रवाई लंबित रखी जाती है। शिकायत में फाइल के संबंध में रात में बुलाने और नोटिस देने की धमकी का उल्लेख भी किया गया है।
एफडीआर वापसी से लेकर पंजीयन नवीनीकरण तक आरोप
शिकायत में बसंत बंजारे ने अपने परिचित अजय कुमार और मनोहर सिंह के रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़े एफडीआर वापसी आवेदनों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, आवेदन दिए करीब एक माह बीतने के बाद भी स्थल निरीक्षण और आगे की प्रक्रिया नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने एफडीआर की 30 प्रतिशत राशि कथित कमीशन के रूप में मांगने और ऐसा नहीं करने पर नोटिस जारी करने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाया है। मानचित्रकार पंजीयन के नवीनीकरण में भी 2 हजार रुपए मांगने की बात शिकायत में कही गई है।
ये आरोप सही हैं या नहीं, इसका निर्धारण जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण से ही हो सकेगा। लेकिन शिकायत ने भवन अनुज्ञा, एफडीआर वापसी और पंजीयन जैसी नागरिकों से जुड़ी सेवाओं की पारदर्शिता पर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
राजस्व बढ़ाना है तो प्रक्रिया सरल और जवाबदेही तय करनी होगी
नगर पालिका के लिए जरूरी है कि भवन अनुज्ञा की प्रक्रिया स्पष्ट हो, आवेदन की कमियां लिखित में बताई जाएं, हर चरण की समय-सीमा तय हो और आवेदक को अपनी फाइल की स्थिति जानने की सुविधा मिले। इससे न केवल नागरिकों को राहत मिल सकती है, बल्कि वैध निर्माण को प्रोत्साहन और अवैध निर्माण पर नियंत्रण के प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है।
बसंत बंजारे ने 13 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कबीरधाम को शिकायत देकर उप अभियंता शिव गर्ग के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव और कवर्धा विधायक एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को भी भेजी गई है।
अब प्रशासन के सामने शिकायत की निष्पक्ष जांच कर आरोपों की सच्चाई सामने लाने और भवन अनुज्ञा सहित नागरिक सेवाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की चुनौती है। उप अभियंता शिव गर्ग और नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। क्योंकि शहर में अवैध निर्माण रोकने के लिए केवल कार्रवाई की सख्ती नहीं, बल्कि वैध निर्माण की अनुमति देने वाली व्यवस्था का सरल, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त होना भी उतना ही जरूरी है।





