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कागजों में विकास, जमीन पर बदहाल हालात: गभोड़ा में सड़क नहीं, पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण; राशन में चना भी गायब

कवर्धा। बोड़ला ब्लॉक के केसमर्दा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव गभोड़ा में विकास के दावे जमीनी हकीकत से बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। बैगा आदिवासी बहुल इस गांव में आज भी सड़क, पानी, बिजली और राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं लोगों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाएं तो स्वीकृत हो जाती हैं, लेकिन उनका लाभ जमीन पर नहीं दिखता।

गांव के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत सड़क स्वीकृत हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ। पक्की सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को रोजाना लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय करना पड़ता है। बारिश के दिनों में हालात और बिगड़ जाते हैं, जब कीचड़ और गड्ढों से भरे रास्ते पर चलना मुश्किल हो जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाना और बच्चों को स्कूल भेजना तक बड़ी चुनौती बन जाता है। परिवहन सुविधा नहीं होने से बाजार से सामान लाना भी महंगा पड़ रहा है।

पानी की समस्या गांव में सबसे गंभीर मुद्दों में से एक है। साफ पेयजल उपलब्ध नहीं होने के कारण महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। हैंडपंप और अन्य जल स्रोतों की कमी के कारण रोजाना घंटों पानी के लिए भटकना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य और दिनचर्या पर असर पड़ रहा है।

बिजली की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। गांव में बिजली की आपूर्ति अनियमित है। कई-कई घंटे बिजली गुल रहती है, जिससे घरेलू कामकाज के साथ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। मोबाइल चार्जिंग जैसी सामान्य जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रहीं।

महिला कल्याण योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। महतारी वंदन योजना के तहत केवाईसी अपडेट कराने में महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दस्तावेजों की कमी और प्रक्रिया की जानकारी न होने के कारण कई पात्र हितग्राही योजना से वंचित हैं।

राशन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि राशन दुकानों में चना जैसी जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं है, जिससे परिवारों की पोषण जरूरतें प्रभावित हो रही हैं। पहले से सीमित संसाधनों में जीवन यापन कर रहे बैगा परिवारों के लिए यह स्थिति और मुश्किल पैदा कर रही है।

गांव के गजरू बैगा, शिवलाल बैगा, सूकलाल बैगा, अर्जुन बैगा, बैसाखू बैगा, फूलबाई, लालिया बाई और टिकली सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं के अभाव में उनका जीवन प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि वे जंगल के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाते हैं, लेकिन विकास की बुनियादी सुविधाएं अब तक उनके गांव तक नहीं पहुंच पाई हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन, जनजाति कल्याण विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि स्वीकृत सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाए। साथ ही पेयजल की स्थायी व्यवस्था, बिजली आपूर्ति में सुधार, राशन दुकानों में नियमित सामग्री उपलब्ध कराने और योजनाओं के लाभ के लिए केवाईसी प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में त्वरित कदम उठाए जाएं।

यह स्थिति साफ तौर पर दिखाती है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी के कारण दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदाय अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

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