
कवर्धा। कबीरधाम जिले की पंडरिया नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) अभिताभ शर्मा को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने निलंबित कर दिया है। विभागीय समीक्षा में राजस्व वसूली लक्ष्य से पीछे रहने और संपत्तियों के नवीन कर निर्धारण (न्यू टैक्स असेसमेंट) समय पर पूरा नहीं करने पर यह कार्रवाई की गई।

जानकारी के मुताबिक 14 जनवरी 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित समीक्षा बैठक में वर्ष 2025-26 के लिए सितंबर 2025 तक संपत्तियों का नया कर निर्धारण पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन समीक्षा में पाया गया कि पंडरिया नगरपालिका में तय समय-सीमा तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, जिससे राजस्व वसूली लक्ष्य प्रभावित हुआ।
विभागीय अधिकारियों ने इसे कार्य के प्रति लापरवाही और उदासीनता माना। आदेश जारी होते ही शर्मा को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया। निलंबन अवधि में उन्हें संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग से संबद्ध किया गया है।
राजस्व वसूली पर सख्ती के संकेत
सूत्रों के अनुसार शासन नगरीय निकायों की आय बढ़ाने और वित्तीय अनुशासन को लेकर सख्त है। कर निर्धारण और वसूली में लापरवाही पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। इस निर्णय के बाद अन्य नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में भी सतर्कता बढ़ गई है।
स्लम स्वास्थ्य योजना में गड़बड़ी: कवर्धा के पूर्व CMO नरेश वर्मा निलंबित, FIR की सिफारिश
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने तत्कालीन कवर्धा नगर पालिका CMO नरेश वर्मा को निलंबित कर दिया है। वर्तमान में वे बेमेतरा नगर पालिका में पदस्थ थे। निलंबन अवधि में उन्हें दुर्ग स्थित संयुक्त संचालक कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
भाजपा नेता की शिकायत के बाद खुली परतें
मामले की शुरुआत खैरागढ़ जिले के पूर्व जिला भाजपा महामंत्री रामाधार रजक की शिकायत से हुई। शिकायत के बाद जांच शुरू हुई। जून 2025 में राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) की जांच में दवा खरीद, वितरण और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी सामने आई।
प्रारंभिक जांच में 20 लाख 80 हजार 380 रुपये की वित्तीय हानि के लिए जिम्मेदारी तय करते हुए वसूली नोटिस जारी किया गया। बाद में गठित विशेषज्ञ समिति की दिसंबर 2025 रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित करने वाली एजेंसी पर नियमानुसार पेनाल्टी नहीं लगाई गई, जिससे करीब 25 लाख 91 हजार 500 रुपये की अतिरिक्त हानि हुई।
दवा खरीद और वितरण में 2 लाख 13 हजार 497 रुपये के अपव्यय सहित कुल 23 लाख 8 हजार 380 रुपये की गड़बड़ी दर्ज की गई। हैरानी की बात यह रही कि अब तक केवल 2 लाख 28 हजार रुपये की ही वसूली हो सकी है।
गंभीर कदाचार, आपराधिक कार्रवाई की अनुशंसा
जांच समिति ने मामले को गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखते हुए कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई, अतिरिक्त भुगतान की वसूली और एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। फिलहाल विभाग ने सेवा शर्तों के उल्लंघन और वित्तीय अनुशासनहीनता के आधार पर निलंबन किया है।
इस प्रकरण ने जनहित योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या शासन आगे एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई करता है या मामला निलंबन और वसूली तक सीमित रहेगा।



