“लेखापाल की कुर्सी या पारिवारिक विरासत?” नेवारी समिति में ‘भतीजा प्रमोशन मॉडल’ पर बवाल

कवर्धा। सहकारिता की किताब में नियमों की स्याही अभी सूखी भी नहीं कि नेवारी सेवा सहकारी समिति में “भतीजा प्रमोशन मॉडल” की चर्चा ने आग पकड़ ली है। आरोप है कि समिति में लेखापाल की कुर्सी अब योग्यता से नहीं, रिश्तेदारी से तय होने वाली है। समिति के कर्मचारियों ने सीधे उप पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, कबीरधाम के दरवाज़े पर दस्तक दी है। शिकायत में साफ लिखा है—20 से 25 साल से पसीना बहा रहे वरिष्ठ कर्मचारी लाइन में खड़े हैं, सेवा रिकॉर्ड दागदार नहीं, अनुभव भरपूर… लेकिन कुर्सी की राह अचानक “घर के आंगन” से होकर क्यों गुजर रही है?
कर्मचारियों का कहना है कि अध्यक्ष और प्रबंधक की कथित मिलीभगत से कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत अध्यक्ष के रिश्तेदार को लेखापाल बनाने की तैयारी चल रही है। यानी सहकारिता की सीढ़ी पर चढ़ने के लिए अब वरिष्ठता नहीं, ‘रिश्तेदारी’ की लिफ्ट काम कर रही है—ऐसा आरोप है। शिकायत में पंजीयक सहकारी संस्थाएं, छत्तीसगढ़ के 27 जनवरी 2018 के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि पदोन्नति वरिष्ठता, पात्रता और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए, लेकिन कर्मचारियों का दावा है कि नियमों की किताब को दरकिनार कर ‘विशेष व्यवस्था’ बनाई जा रही है।
शिकायतकर्ताओं ने प्रस्तावित पदोन्नति पर तत्काल रोक लगाने, पात्र वरिष्ठ कर्मचारियों को नियम अनुसार अवसर देने और पूरे मामले की निष्पक्ष विभागीय जांच कराने की मांग की है। समिति के गलियारों में फिलहाल फुसफुसाहट तेज है और असंतोष खुलकर सामने आ चुका है। अब निगाहें जांच पर टिक गई हैं—तय होगा कि लेखापाल की कुर्सी सहकारिता की होगी या परिवारवाद की।



